
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में अवैध खनन पर शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए वर्ष 2024-25 से जून 2025 तक 6,331 मामलों में कार्रवाई की है। इन कार्रवाइयों के अंतर्गत ₹18.02 करोड़ की वसूली, 184 मशीनों की जब्ती, 56 एफआईआर और 57 न्यायालयीन परिवाद दर्ज किए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से गठित जिला व राज्य स्तरीय टास्क फोर्स लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।
रेत खनन नीति में बड़ा सुधार
सरकार ने राज्य की रेत खनन नीति को पारदर्शी, वैज्ञानिक और जनहितैषी बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में राज्य में 300 से घटकर लगभग 100-150 खदानें रह गई थीं, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुए और अवैध खनन को बढ़ावा मिला।
नई सरकार ने नीति में बदलाव कर इसे अधिक संगठित, नियंत्रित और पर्यावरण-संवेदनशील बनाया है।
वैध खदानों की संख्या में इज़ाफ़ा
- वर्तमान में 119 खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ संचालित हैं।
- 94 खदानों की स्वीकृति प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
- अगले 1 से 1.5 वर्षों में 300+ नई खदानें स्वीकृत की जाएंगी, जिससे रेत की आपूर्ति सुचारु और निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।
पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में तेजी
खनिज परियोजनाओं को शीघ्र पर्यावरणीय स्वीकृति दिलाने हेतु राज्य सरकार ने भारत सरकार की अनुमति से तीन राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण समितियाँ गठित की हैं। पहले केवल एक समिति कार्यरत थी।
वैज्ञानिक अध्ययन का समर्थन
राज्य सरकार द्वारा IIT रुड़की से कराए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि नियंत्रित और विधिवत खनन से नदियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह अध्ययन राज्य की वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित खनिज नीति को बल प्रदान करता है।
तेज़ कार्रवाई और निगरानी
रेत से जुड़े विवादों में राजनांदगांव और बलरामपुर जैसे जिलों में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन व पर्यावरण विभाग की संयुक्त टीमों ने जमीनी स्तर पर निगरानी तेज की है। शासन का स्पष्ट निर्देश है — “अवैध खनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
गरीबों को राहत: रॉयल्टी में छूट
15 मार्च 2024 को सरकार ने निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को रेत पर रॉयल्टी में छूट दी जाएगी। इस फैसले से गरीबों को आवास निर्माण में प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिली है।
भविष्य की दिशा: पारदर्शिता, संरक्षण और विकास
छत्तीसगढ़ सरकार की नई नीति का उद्देश्य है:
“खनिज संसाधनों का दोहन इस प्रकार हो कि वह जनहित, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के सिद्धांतों पर आधारित हो।”
यह नीति दीर्घकालिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण — तीनों में संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
