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शहरी-ग्रामीण परिवारों को मिल रहा आर्थिक संबल छत्तीसगढ़ के घर बन रहे ऊर्जा के नए केंद्र सौर क्रांति से ‘शून्य बिजली बिल’ : 


10 सितम्बर 2026 //

रायपुर न्यूज़ धमाका – छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा बनी आर्थिक सशक्तिकरण का नया जरिया, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ से परिवारों को मिल रहा शून्य बिजली बिल और अतिरिक्त आय का लाभ।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के जरिए शहरी और ग्रामीण परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली खर्च में बचत कर रहे हैं। केंद्र और राज्य की सब्सिडी, आसान ऋण और नेट-मीटरिंग की सुविधा से कई परिवार शून्य बिजली बिल के साथ अतिरिक्त बिजली ग्रिड को देकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।

डबल सब्सिडी से आसान हुआ सोलर अपनाना

छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आकर्षक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। 1 किलोवाट के संयंत्र पर केंद्र से ₹30,000 और राज्य से ₹15,000 यानी कुल ₹45,000 तक की सहायता मिलती है। इसी तरह 2 किलोवाट के सिस्टम पर केंद्र की ₹60,000 और राज्य की ₹30,000 सहायता मिलाकर कुल ₹90,000 तक सब्सिडी मिलती है। वहीं 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले संयंत्रों के लिए केंद्र से ₹78,000 और राज्य से ₹30,000 की सहायता यानी कुल ₹1.08 लाख तक की सब्सिडी उपलब्ध है। इस दोहरी वित्तीय सहायता से सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो जाता है और अधिक से अधिक परिवार स्वच्छ ऊर्जा को अपना रहे हैं।

आसान ऋण से हर परिवार की पहुंच में सौर ऊर्जा

सोलर संयंत्र लगाने में एकमुश्त राशि की समस्या परिवारों के लिए बाधा न बने, इसके लिए आसान ऋण की व्यवस्था भी की गई है। जनसमर्थ पोर्टल और विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को किफायती ब्याज दरों पर कोलैटरल-फ्री सोलर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ऐसे परिवार भी सौर ऊर्जा अपना पा रहे हैं, जो एकमुश्त निवेश करने की स्थिति में नहीं थे।

‘शून्य बिजली बिल’ से बढ़ रही परिवारों की बचत

रूफटॉप सोलर प्लांट का सबसे बड़ा लाभ बिजली खर्च में कमी के रूप में सामने आ रहा है। सौर ऊर्जा से घर की जरूरत पूरी होने के बाद बची बिजली को नेट-मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड में भेजा जा सकता है। इस व्यवस्था से परिवार अपने बिजली बिल को कम या शून्य करने के साथ अतिरिक्त बिजली के बदले आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। यानी सौर ऊर्जा अब परिवार के मासिक बजट पर बोझ कम करने के साथ अतिरिक्त आय का माध्यम भी बन रही है।

₹1,500 के बिल से ₹5,000 की अतिरिक्त कमाई तक

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छिंद गांव निवासी लोकनाथ साव की कहानी इस बदलाव की प्रभावी मिसाल है। पहले उन्हें हर महीने करीब ₹1,500 बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। योजना से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाया। अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। घरेलू जरूरत पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भेजकर वे हर महीने करीब ₹5,000 की अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि सौर ऊर्जा ग्रामीण परिवारों के लिए बचत के साथ आय का जरिया भी बन सकती है।

उपभोक्ता से बने ‘बिजली दाता’
अम्बिकापुर विकासखंड के आमदरहा गांव निवासी आलम साय रजवाड़े के लिए भी सौर ऊर्जा आर्थिक बदलाव लेकर आई। सोलर संयंत्र की स्थापना पर उन्हें केंद्र और राज्य सरकार से कुल ₹1.08 लाख की सब्सिडी मिली। पहले हर महीने ₹1,500 से ₹2,000 तक बिजली बिल चुकाने वाले आलम साय का बिल अब शून्य हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भेजकर पिछले साढ़े तीन महीनों में 850 यूनिट बिजली उपलब्ध कराई। इस तरह वे बिजली के उपभोक्ता से बिजली दाता बन गए हैं। अम्बिकापुर जिले में निर्धारित 2,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,733 सोलर संयंत्रों की स्थापना इस अभियान की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

सालाना बचत के साथ पड़ोसियों को भी मिली प्रेरणा

राजनांदगांव शहर के बसंतपुर वार्ड क्रमांक 46 निवासी यशवंत साहू ने जनवरी 2026 में अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर रूफटॉप संयंत्र लगवाया। ₹1.80 लाख की कुल लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र से ₹78,000 और राज्य से ₹30,000 यानी कुल ₹1.08 लाख की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें अपनी जेब से ₹72,000 खर्च करने पड़े। पहले गर्मियों में उनका बिजली बिल ₹2,200 तक और सामान्य दिनों में ₹1,500 से ₹1,800 तक पहुंच जाता था। सोलर प्लांट लगने के बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया और सालाना ₹15,000 से अधिक की बचत होने लगी। यशवंत साहू की सफलता अब उनके आसपास के लोगों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

दंतेवाड़ा में भी सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता की राह

दंतेवाड़ा के देवेंद्र झाड़ी ने महंगे बिजली बिल से राहत पाने के लिए 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किया। केंद्र और राज्य की दोहरी सब्सिडी से संयंत्र लगाने की लागत का बोझ कम हुआ। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से उनके बिजली खर्च में बड़ी कमी आई है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में भी यह आर्थिक स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बन रही है।

गांवों से शहरों तक पहुंच रही हरित क्रांति

छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों और आदिवासी अंचलों तक किया जा रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय युवाओं को भी इस अभियान से जोड़कर रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। CSPDCL और CREDA के माध्यम से जागरूकता शिविरों के जरिए लोगों को योजना की जानकारी देने के साथ पात्र हितग्राहियों को आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ

सौर ऊर्जा का यह मॉडल बिजली व्यवस्था में नागरिकों की भूमिका को भी बदल रहा है। पहले परिवार केवल बिजली खरीदने वाले उपभोक्ता थे, लेकिन रूफटॉप सोलर और नेट-मीटरिंग के जरिए अब वे बिजली का उत्पादन कर अतिरिक्त ऊर्जा ग्रिड को उपलब्ध करा सकते हैं। यही बदलाव उन्हें Consumer से Prosumer यानी उपभोक्ता से उत्पादक की भूमिका में ले जा रहा है। रूफटॉप सोलर का लाभ केवल बिजली बिल तक सीमित नहीं है। स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इस तरह ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ छत्तीसगढ़ में एक साथ तीन महत्वपूर्ण लक्ष्यों बिजली बचत, आर्थिक सशक्तिकरण और हरित विकास को आगे बढ़ाने का माध्यम बन रही है।

सौर ऊर्जा बनी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की नई पहचान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा का विस्तार ‘शून्य बिजली बिल’ की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन रहा है। डबल सब्सिडी, आसान ऋण, नेट-मीटरिंग और जागरूकता अभियानों के जरिए सौर ऊर्जा की पहुंच लगातार बढ़ रही है। लोकनाथ साव, आलम साय रजवाड़े, देवेंद्र झाड़ी और यशवंत साहू जैसे हितग्राहियों की कहानियां बताती हैं कि सूरज की रोशनी अब सिर्फ घर रोशन नहीं कर रही, बल्कि परिवारों की आर्थिक तस्वीर भी बदल रही है। यही सौर क्रांति आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में नई पहचान दे सकती है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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