
03 सितम्बर 2026 //
रायपुर न्यूज़ धमाका – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के 12 पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को गैरकानूनी माना। याचिकाकर्ता को 3 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि महिलाओं के लिए आरक्षित पदों को बिना वैधानिक प्रावधान के पुरुष अभ्यर्थियों से भरना नियमों के खिलाफ है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की अदालत ने रायपुर नगर निगम की वर्ष 2013-14 की सहायक शिक्षक भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के 12 पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को गैरकानूनी माना है।
2013-14 में निकली थी 204 पदों पर भर्ती
रायपुर नगर निगम ने सहायक शिक्षक यानी शिक्षाकर्मी वर्ग-3 (विज्ञान) के कुल 204 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसी भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के लिए 12 पद आरक्षित थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन पदों पर नियमों के विपरीत पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी गई। धमतरी निवासी नम्रता देवांगन ने इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
60.70 अंक हासिल करने के बावजूद नहीं मिली नियुक्ति
याचिकाकर्ता के मुताबिक उन्होंने ओबीसी महिला वर्ग में 60.70 अंक प्राप्त किए थे और मेरिट सूची में उनका स्थान 1594वां था। उनका कहना था कि महिला वर्ग के लिए निर्धारित पद पुरुष उम्मीदवारों को दिए जाने की वजह से उन्हें वर्ष 2014 में नियुक्ति नहीं मिल सकी। नगर निगम ने अदालत में अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए वर्ष 1997 के एक सर्कुलर का हवाला दिया था। निगम का तर्क था कि योग्य महिला अभ्यर्थी न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल नहीं कर सकीं, इसलिए पदों को उसी वर्ग के पुरुष अभ्यर्थियों से भरा गया।
हाईकोर्ट ने कहा- आरक्षित पद दूसरे वर्ग को देना गैरकानूनी
हाईकोर्ट ने नगर निगम की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी वैधानिक नियम के आधार के बिना महिलाओं के लिए आरक्षित पदों को पुरुष उम्मीदवारों से भरना पूरी तरह गलत है। कोर्ट ने माना कि नगर निगम की इस प्रक्रिया की वजह से नम्रता को निर्धारित समय पर नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पाया।
12 पुरुष शिक्षकों की नौकरी नहीं होगी खत्म
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नम्रता को बाद में गणित शिक्षिका के पद पर नियुक्ति मिल चुकी है। वहीं, जिन 12 पुरुष शिक्षकों की नियुक्ति करीब 12 साल पहले हो चुकी थी, उनकी लंबी सेवा अवधि को देखते हुए हाईकोर्ट ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश नहीं दिया।
मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए 3 लाख रुपये मुआवजा
हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में नगर निगम की गलती के कारण याचिकाकर्ता को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान को अदालत ने गंभीरता से लिया। हाईकोर्ट ने रायपुर नगर निगम कमिश्नर को नम्रता देवांगन को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।



