
12 अगस्त 2026 //
दिल्ली न्यूज़ धमाका – दिल्ली की जनता को अब सरकारी सेवाओं के लिए लंबे इंतजार का सामना नहीं करना पड़ेगा। दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया गया, जिसके तहत 500 से अधिक सरकारी सेवाएं तय समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। सेवा देने में देरी होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। नए कानून के तहत यदि किसी नागरिक को निर्धारित समय में सेवा नहीं मिलती है, तो उसकी शिकायत स्वतः ही उच्च अधिकारियों तक पहुंच जाएगी। इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। विधानसभा ने दिल्ली की बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को समाप्त करने संबंधी विधेयक को भी मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के लिए अधिक प्रभावी नीति लाई जाएगी।
यदि किसी सेवा को निर्धारित समय में उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही, सेवा में देरी से जुड़ी शिकायत स्वतः ही वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच जाएगी, जिससे जवाबदेही तय करने और शिकायतों के त्वरित समाधान में मदद मिलेगी।सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकारी सेवाओं की डिलीवरी में पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह नया कानून वर्ष 2011 के मौजूदा अधिनियम की जगह लेगा।
घर बैठे देख सकेंगे आवेदन की स्थिति
दिल्ली के आईटी मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि सेवाओं की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक आवेदन को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा, जिससे नागरिक घर बैठे ऑनलाइन अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यदि किसी आवेदन पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो वह स्वतः ऑटो-एस्केलेशन प्रणाली के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। इससे लंबित मामलों की निगरानी आसान होगी और सेवाओं के समय पर निपटारे को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
5000 रुपये तक का जुर्माना
नए प्रावधानों के तहत बिना उचित कारण सेवा में देरी करने या गलत तरीके से आवेदन खारिज करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। कानून के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम 5,000 रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा यदि किसी आवेदन को गलत तरीके से अस्वीकार किया जाता है तो संबंधित अधिकारी पर 250 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि किसी भी कार्रवाई से पहले अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
इन संस्थाओं पर भी लागू होगा कानून
यह कानून पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में लागू होगा। इसके दायरे में दिल्ली सरकार के नियमित कर्मचारियों के अलावा नगर निगम नई दिल्ली नगर पालिका परिषद दिल्ली छावनी परिषद, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण तथा अन्य अधिसूचित स्थानीय निकायों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाने वाली निर्धारित सेवाएं भी शामिल होंगी।
ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी हुई वापस
दिल्ली विधानसभा में ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को वापस लेने का विधेयक भी मंगलवार को पारित कर दिया गया। मालवीय नगर अग्निकांड में सामने आई खामियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन करते हुए संचालित हो रही इकाइयों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था की जगह जल्द ही एक अधिक प्रभावी और सुरक्षित नई नीति लाई जाएगी, जिससे पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सके।
2025 तक की झुग्गियों का होगा पुनर्वास
विधानसभा ने झुग्गी पुनर्वास से जुड़े संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दे दी। इसके तहत अब वर्ष 2025 तक बनी सभी झुग्गियों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी, यदि उन्हें किसी परियोजना या अन्य कारणों से हटाया जाता है। इससे पहले यह सुविधा केवल वर्ष 2015 तक बनी झुग्गियों के निवासियों को ही उपलब्ध थी। नए संशोधन के बाद पुनर्वास के दायरे का विस्तार हो गया है, जिससे बड़ी संख्या में झुग्गीवासियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।


