बॉलीवुड धमाका

एक्टर को जेल पहुंचाने वाले वकील का शॉकिंग दावा संजय दत्त रोक सकते थे 1993 का मुंबई बम ब्लास्ट

15 जुलाई 2026 //

फ़िल्मी धमाका – आर्म्स एक्ट के तहत जेल काट चुके अभिनेता संजय दत्त को लेकर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने 1993 मुंबई बम ब्लास्ट का जिक्र करते हुए कहा कि एक्टर के एक फैसले से कई लोगों की जान बच सकती थी

1993 में अवैध रूप से हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त गिरफ्तार हुए थे। यह मामला इतना अहम था कि इतने सालों बाद भी लोग इस पर बात करते हैं। अब मामले में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अभिनेता संजय दत्त को लेकर बड़ा खुलासा किया है।इस मामले में एक्टर को जेल भिजवाने में अहम भूमिका निभाने वाले उज्ज्वल निकम ने कहा है कि अगर उस समय संजय दत्त ने सही समय पर पुलिस को जानकारी दे दी होती, तो संभव है कि 1993 के मुंबई बम धमाकों की साजिश को पहले ही बेनकाब किया जा सकता था और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

संजय दत्त आतंकवादी नहीं थे’
‘लल्लनटॉप’ से बातचीत के दौरान उज्ज्वल निकम ने कहा कि उन्होंने कोर्ट से कड़ी सज़ा देने की मांग तो की थी, लेकिन उन्होंने कभी भी संजय दत्त को आतंकवादी नहीं माना। उन्होंने कहा, “मैं साफ करना चाहता हूं कि संजय दत्त आतंकवादी नहीं हैं। यह उनकी बचकानी हरकत थी। उनकी आंखों में यह साफ दिखता था। उन्हें हथियारों में दिलचस्पी थी और उस समय बहुत से लोग अंडरवर्ल्ड से आकर्षित होते थे। उनसे जुड़ा होना एक तरह का रुतबा माना जाता था।”

‘एक सूचना से बच सकती थीं कई जानें’

उज्ज्वल निकम ने बताया कि जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े अबू सलेम हथियारों से भरा ट्रक लेकर आया था, तब संजय दत्त ने कुछ हथियार अपने पास रख लिए थे और बाकी वापस कर दिए थे।

निकम का कहना है कि अगर उसी समय संजय दत्त पुलिस को इसकी सूचना दे देते, तो जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क तक पहुंच सकती थीं। इससे बम धमाकों की साजिश का समय रहते खुलासा हो सकता था, कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी और आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि यही बात उन्हें हमेशा सबसे ज्यादा खलती रही।

सजा के बाद भी कायम रहा सम्मान का रिश्ता

उज्ज्वल निकम ने यह भी बताया कि अदालत की कार्यवाही और सजा के बावजूद उनके और संजय दत्त के बीच कभी व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रही।उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने के बाद संजय दत्त उनसे कई बार मिले और हमेशा सम्मान के साथ पेश आए। निकम के अनुसार, उनका किसी भी आरोपी के साथ निजी विवाद नहीं होता और वे केवल कानून के दायरे में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं

फैसला सुनते वक्त कांप रहे थे संजय दत्त

पूर्व सरकारी वकील ने अदालत के उस भावुक पल को भी याद किया, जब संजय दत्त को सजा सुनाई गई थी। निकम ने बताया कि फैसला सुनते ही संजय दत्त काफी घबरा गए थे और लगातार कह रहे थे कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया और वे वापस लौटेंगे। उनकी हालत ऐसी थी कि वे कांप रहे थे।

निकम ने उन्होंने खुद संजय दत्त को संभालते हुए कहा कि मीडिया उन्हें देख रही है, इसलिए खुद को मजबूत रखें। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों से उन्हें वहां से ले जाने को कहा। उनके अनुसार, अगर उस समय उन्होंने संजय दत्त का हौसला नहीं बढ़ाया होता, तो मीडिया उन्हें पूरी तरह गलत तरीके से पेश कर सकती थी।

1993 में आर्म्स एक्ट के तहत हुई थी संजय दत्त की गिरफ्तारी

गौरतलब है कि वर्ष 1993 में संजय दत्त को अवैध हथियार रखने के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह मामला देश के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में शामिल रहा। हालांकि, उन्हें आतंकवाद के आरोपों से राहत मिली थी, लेकिन अवैध हथियार रखने के मामले में उन्हें सजा भुगतनी पड़ी। आज भी यह मामला भारतीय न्यायिक इतिहास और बॉलीवुड के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता
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