
रायपुर न्यूज़ धमाका – गर्मी के मौसम का विशेष ध्यान रखते हुए जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की पहल पर शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर के पीजी हास्टल मेस में इसका विशेष इंतजाम किया जा रहा है।
भारी गर्मी के बीच उपचार करने की ड्यूटी और पढ़ाई के तनाव से जूनियर डॉक्टरों अलग को ‘बोरे बासी” राहत दे रहा है। गर्मी के मौसम का विशेष ध्यान रखते हुए जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की पहल पर शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर के पीजी हास्टल मेस में इसका विशेष इंतजाम किया जा रहा है। बोरे बासी के साथ तड़का लगा दही इसका स्वाद स्थानीय के साथ दूसरे राज्यों से पढ़ाई के लिए आने जूनियर डॉक्टरों को भी भा रहा है।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की विशेष डिमांड पर संभवतः मेडिकल कालेज के इतिहास में पहली बार पीजी डॉक्टरों के खाने के मेनू में छत्तीसगढ़ी खानपान को शामिल किया गया है। पीजी डॉक्टरों के मुताबिक मेस में सामान्यतः रोटी, चावल, दाल के साथ अलग-अलग सब्जी परोसी जाती है। गर्मी के दौरान मसालेदार खाना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है।
जूनियर डॉक्टर को भा रहा छत्तीसगढ़ खानपान
इसे ध्यान में रखते हुए जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों ने खाने के मेन में बोरे बासी को शामिल करने की पहल की। इसे तैयार करने में कोई विशेष मेहनत की जरूरत नहीं थी, इसलिए मेस का संचालन करने वाले ने तुरंत सहमति दे दी। काफी दिनों से खाने के अन्य व्यंजनों के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खाना बोरे-बासी को तड़का लगे दही के साथ परोसा जा रहा है जो जूनियर डॉक्टरों की विशेष पसंद बना हुआ है। यह डॉक्टरों को डिहाईड्रेशन से बचा रहा है, साथ ही भारी-भरकम आईली और मसालेदार खाने का बेहतर विकल्प दे रहा है।
कटोरा नहीं, इसलिए प्लेट से चला रहे काम
सूत्रों के मुताबिक, मेस में प्रतिदिन सौ से ज्यादा पीजी डॉक्टरों के खाने का इंतजाम किया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में बोरे-बासी खाने के लिए कटोरे की व्यवस्था करना मुश्किल था, इसलिए जूनियर डॉक्टर खाने की थाली और प्लेट में ही इस छत्तीसगढ़ी खानपान का मजा ले रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों को परोसा जाने वाला बोरे-बासी सोशल मीडिया में भी खूब पसंद किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और स्वास्थ्य का प्रतीक
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने बताया कि, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और खान-पान में “बोर-बासी” का विशेष महत्व रहा है। यह केवल एक पारंपरिक भोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की मेहनतकश संस्कृति, प्रकृति से जुड़ाव और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली का प्रतीक है। बोरे-बासी हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक सोच और संतुलित आहार व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। चावल को रातभर पानी में भिगोकर तैयार किया जाने वाला बोर-बासी प्राकृतिक प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर के लिए लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए मेस के मेनू में इसे शामिल करने की पहल की गई थी। जिसे सभी जूनियर डॉक्टर पसंद कर रहे



