
कोंडागांव न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के आजाक थाना क्षेत्र में रहने वाले एक आदिवासी युवक रामचंद मरकाम ने न्याय नहीं मिलने से परेशान होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। पत्र में युवक ने दर्द भरे शब्दों में सवाल किया है — “मैं क्या करूं, आत्महत्या करूं या फिर प्रताड़ित करने वालों का मर्डर करूं?”
1 साल 8 महीने से न्याय के लिए भटक रहा युवक
रामचंद मरकाम का आरोप है कि कुछ सामान्य वर्ग के लोगों ने उसकी जमीन पर कब्ज़ा कर लिया है और स्थानीय पुलिस उनकी मदद कर रही है। उसने इस मामले में आजाक थाना प्रभारी को शिकायत दी थी, लेकिन 1 साल 8 महीने बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
युवक के अनुसार, उसने इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक, पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान मुख्यमंत्री और अनुसूचित जनजाति आयोग तक से की, लेकिन कहीं से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कलेक्टर को सौंपा राष्ट्रपति के नाम पत्र
थक-हारकर मंगलवार को रामचंद मरकाम ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम लिखित पत्र सौंपा। पत्र में उसने लिखा है कि जब गैर-आदिवासी लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होती है, तो उसकी शिकायत पर इतनी लंबी चुप्पी क्यों?
उसने राष्ट्रपति से पूछा है कि “अगर मुझे इंसाफ नहीं मिलना है, तो बताइए मैं क्या करूं — आत्महत्या कर लूं या प्रताड़ित करने वालों का मर्डर कर दूं?”
प्रशासन और पुलिस पर गंभीर सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदिवासी युवक की पीड़ा और न्याय की मांग अब सीधे देश की प्रथम नागरिक तक पहुंच चुकी है।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि पत्र प्राप्त हुआ है और इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
इस घटना के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आदिवासी संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि पीड़ित को समय पर न्याय नहीं मिला, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के अधिकारों का सवाल बन जाएगा।



