
बीजापुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित भोपालपटनम कन्या छात्रावास से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। छात्रावास में रह रही कक्षा 12वीं की एक नाबालिग आदिवासी छात्रा के चार माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई है। इस प्रकरण ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस की जांच समिति ने की गहन पड़ताल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित नौ सदस्यीय जांच समिति ने भानुप्रतापपुर की विधायक सावित्री मंडावी के नेतृत्व में शनिवार को भोपालपटनम छात्रावास का दौरा किया। समिति ने छात्रा, छात्रावास स्टाफ, अधीक्षक, शिक्षकों और डॉक्टरों से बातचीत कर जानकारी एकत्र की।
प्रेस वार्ता में विधायक सावित्री मंडावी ने आरोप लगाया कि,
“छात्रा की गर्भावस्था की जानकारी को जानबूझकर छुपाया गया। परिजनों को डराया-धमकाया गया और छात्रा को ज़बरन घर भेजने का दबाव डाला गया। यह सरकार की लापरवाह और संवेदनहीन कार्यप्रणाली को दर्शाता है।”
प्रशासन पर पर्दा डालने का आरोप
मंडावी ने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति को पीड़िता के परिवार से मिलने से रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने पूछा,
“अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? छात्रावास में इतनी बड़ी चूक के बावजूद अधिकारी खुले घूम रहे हैं।”
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी।
जांच समिति में शामिल प्रमुख सदस्य
- देवती कर्मा (पूर्व विधायक)
- नीना रावतिया (प्रदेश कांग्रेस महामंत्री)
- सरिता चापा (पूर्व जिला पंचायत सदस्य)
- गीता कमल (महिला कांग्रेस अध्यक्ष, बीजापुर)
- रिंकी कोरम (अध्यक्ष, नगर पंचायत भोपालपटनम)
- पार्वती कश्यप, अनिता तेलम और अन्य
मेडिकल जांच से हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार छात्रा गर्मी की छुट्टियों के बाद छात्रावास लौटी थी। पेट दर्द की शिकायत पर जब उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, तब डॉक्टरों ने जांच में गर्भवती होने की पुष्टि की। छात्रा आदिवासी विकास विभाग के छात्रावास में रह रही थी। यह मामला 24 जुलाई को सामने आया और इसके बाद से ही प्रशासन और शिक्षा विभाग पर सवालों की बौछार हो रही है।
सख्त कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही छात्रावासों में रहने वाली बालिकाओं की सुरक्षा के लिए सुनिश्चित निगरानी और जवाबदेही प्रणाली लागू की जाए।
