
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के अभनपुर थाना क्षेत्र के विरोदा गांव में बुजुर्ग दंपती की नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। भूखन ध्रुव (62) और उनकी पत्नी रुखमणी ध्रुव (60) की हत्या के आरोप में पुलिस ने झोलाछाप डॉक्टर राकेश बारले को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इलाज के पैसों को लेकर हुए विवाद में आरोपी ने दोनों की गला रेतकर हत्या कर दी।
घटना का खुलासा ऐसे हुआ
16 जुलाई को जब भूखन ध्रुव रोज की तरह खेत नहीं पहुंचे, तो एक पड़ोसी उन्हें बुलाने उनके घर गया। घर का दरवाजा खुला मिला और अंदर जाकर उसने जो देखा, उससे गांव में सनसनी फैल गई — भूखन ध्रुव मृत अवस्था में पड़े थे। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस को घर के अंदर रुखमणी ध्रुव की लाश भी मिली।
आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश की, लेकिन फंसा डीएनए से
हत्या के बाद आरोपी डॉक्टर ने घटना स्थल से सबूत मिटाने की हर संभव कोशिश की:
- घर की लाइट बंद कर दी ताकि पहचान न हो सके
- लेकिन स्विच बोर्ड पर खून के धब्बे रह गए
- फॉरेंसिक जांच में खून पर मिले फिंगरप्रिंट आरोपी से मैच हो गए
- आरोपी ने तालाब में खून से सने कपड़े धोने की कोशिश भी की, लेकिन कपड़ों और शरीर पर खून के निशान रह गए
इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने राकेश बारले को गिरफ्तार कर लिया।
इलाज के पैसों को लेकर हुआ था विवाद
राकेश बारले गांव में झोलाछाप डॉक्टर के रूप में पहचान बना चुका था और अक्सर रुखमणी ध्रुव का इलाज करता था। पुलिस के अनुसार:
“महिला से पैसे को लेकर पहले भी उसकी कई बार कहासुनी हो चुकी थी। घटना वाले दिन भी वह बकाया पैसे मांगने पहुंचा और विवाद इतना बढ़ा कि बात हत्या तक पहुंच गई।”
गुस्से में आकर राकेश ने पहले रुखमणी की गला रेतकर हत्या की, और शोर सुनकर बचाने आए पति भूखन को भी मौत के घाट उतार दिया।
गांव में भय का माहौल, पुलिस ने की फॉरेंसिक जांच
घटना के बाद फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। पुलिस ने स्विच बोर्ड, खून के सैंपल, कपड़े और घटनास्थल से सबूत एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या नहीं, बल्कि अचानक गुस्से में की गई नृशंस वारदात है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
“हमने कभी नहीं सोचा था कि पैसे के लिए कोई डॉक्टर ऐसा कर सकता है। वो अक्सर घर आता-जाता था। अब डर लगने लगा है।”
— गांव के एक पड़ोसी की प्रतिक्रिया
आगे की कार्रवाई
- आरोपी राकेश बारले को IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत जेल भेजा गया है
- पुलिस ने कोर्ट से फास्ट ट्रैक ट्रायल की सिफारिश की है
- स्वास्थ्य विभाग को भी उसकी पृष्ठभूमि की जांच कर फर्जी डिग्री और क्लीनिक संचालन पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है
निष्कर्ष
इलाज के नाम पर झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही और बिना लाइसेंस चिकित्सा प्रैक्टिस न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह जिंदगियों के लिए घातक बन सकती है। यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।



