
बिलासपुर न्यूज धमाका – सारंगढ़ उप जेल में कैदियों से ऑनलाइन वसूली और मारपीट की सनसनीखेज शिकायतों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्देश पर जांच के बाद दो अधिकारियों को दोषी पाया गया है। इनमें से सहायक जेल अधीक्षक संदीप कुमार कश्यप को निलंबित कर दिया गया है, जबकि वार्डन महेश्वर हिचामी को दो वेतन वृद्धि रोकने की सजा दी गई है।
हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान
याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं ने हाई कोर्ट में दस्तावेज पेश कर आरोप लगाया था कि जेल कर्मी कैदियों से कैश के अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए भी जबरन वसूली करते हैं, और मांगें न मानने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। यह मामला हाई कोर्ट के सामने आने के बाद 3 अप्रैल 2025 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
शपथ पत्र में राज्य सरकार ने मानी दोषियों की पुष्टि
राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट में प्रस्तुत शपथ पत्र में जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि:
- वार्डन महेश्वर हिचामी के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए हैं।
सजा: दो वेतन वृद्धि रोकी गई
कार्रवाई पूर्ण - सहायक जेल अधीक्षक संदीप कुमार कश्यप पर भी आरोप सिद्ध हुए हैं,
लेकिन चूंकि वे राज्य सेवा के अधिकारी हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) से मंजूरी मांगी गई है।
रिमाइंडर भेजा गया है, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिली है।
फरवरी में हुआ था निलंबन, दो प्रहरी भी नपे
सारंगढ़ जेल में सामने आए घटनाक्रम की जांच बिलासपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक खोमेश मण्डावी ने 28 फरवरी को की थी, जिसके बाद:
- संदीप कश्यप (सहायक जेल अधीक्षक) को निलंबित किया गया
- सारंगढ़ के दो अन्य प्रहरी भी निलंबन की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं
मामले की अगली सुनवाई अब अगस्त 2025 में होनी है, जिसमें हाई कोर्ट PSC की अनुमति सहित आगे की कार्रवाई की समीक्षा करेगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
“अगर जेल जैसी संरक्षित जगह पर भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से वसूली हो रही है, तो यह पूरे तंत्र पर सवाल खड़ा करता है। उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप और पारदर्शी जांच स्वागत योग्य कदम है।”
— कानूनी विश्लेषक, अजय दुबे
निष्कर्ष
यह मामला केवल जेल में भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि कैदियों के मानवाधिकारों, न्यायिक निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता का भी है। पीएससी की मंजूरी के बाद संदीप कश्यप पर उचित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।



