
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को रिमांड अवधि पूरी होने पर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया। ईडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग की है।
जन्मदिन पर हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने 18 जुलाई को भिलाई स्थित बघेल निवास में छापा मारकर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। उसी दिन उनका जन्मदिन भी था। उन्हें पांच दिन की रिमांड पर भेजा गया था, जो आज यानी 22 जुलाई को समाप्त हो रही है।
16.70 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
ईडी की अब तक की जांच में सामने आया है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये की अवैध राशि (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम – POC) प्राप्त हुई।
ईडी के अनुसार:
- उन्होंने इस राशि को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया।
- नकद भुगतान, बैंक एंट्रीज और फर्जी फ्लैट खरीद के माध्यम से धन को वैध दिखाया गया।
- उन्होंने व्यापारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों से सांठगांठ कर करीब 5 करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किए।
1000 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति के संचालन का आरोप
ईडी का कहना है कि चैतन्य बघेल पर 1000 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति के संचालन का भी आरोप है।
वे:
- अनवर ढेबर और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर राजनीतिक फंड ट्रांसफर की योजना का हिस्सा रहे।
- शराब घोटाले की राशि को कांग्रेस पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष तक पहुंचाने में समन्वय करते थे।
- यह राशि कथित रूप से बघेल परिवार के नजदीकी सहयोगियों को निवेश के लिए दी गई।
ईडी की कार्रवाई और अब तक गिरफ्तार लोग
शराब घोटाले में अब तक कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:
- पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा
- व्यवसायी अरविंद सिंह
- त्रिलोक सिंह ढिल्लों
- अनवर ढेबर
- ITS अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी
- और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा
ईडी का कहना है कि इस पूरे घोटाले से प्रदेश को 2500 करोड़ रुपये का राजकोषीय नुकसान हुआ है।
आगे की जांच जारी
ईडी ने संकेत दिया है कि घोटाले से प्राप्त धन का अंतिम उपयोग अभी जांच के दायरे में है। बैंक ट्रांजैक्शन, संपत्ति की खरीद-बिक्री और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।
राजनीतिक हलचल तेज —
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कह रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य की सियासत और भी गर्माने की संभावना है।



