
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति का मामला एक बार फिर टल गया है। बिलासपुर हाई कोर्ट में बुधवार को जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने रिज्वाइंडर दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई 2025 को होगी।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता नारायण प्रकाश तिवारी ने राज्य शासन द्वारा तय किए गए प्राचार्य पदोन्नति के मापदंडों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने पूर्व में डिवीजन बेंच के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए शासन के मापदंडों को वैध माना गया था। उन्होंने याचिका खारिज करने की अपील की, लेकिन कोर्ट ने रिज्वाइंडर दाखिल करने का मौका देने का निर्णय लिया।
अब तक की स्थिति:
- शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल को पदोन्नति सूची जारी की थी
- 1 मई को हाई कोर्ट ने सूची पर रोक लगा दी
- 9 जून से 17 जून तक लगातार सुनवाई हुई
- शासन, लाभार्थी और हस्तक्षेपकर्ताओं ने अपना पक्ष मजबूती से रखा
- डिवीजन बेंच ने पूर्व में 6 याचिकाएं खारिज की थीं
महाधिवक्ता का तर्क:
महाधिवक्ता ने कोर्ट में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत का हवाला देते हुए जल्द निर्णय की मांग की। लेकिन कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार किया।
शिक्षक संगठन की चिंता:
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग और संचालक लोक शिक्षण से चर्चा कर कहा कि प्राचार्य के अधिकांश पद खाली हैं, और नए सत्र में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सुनवाई के दौरान शिक्षक संघ के कई पदाधिकारी जैसे मनोज सनाढ्य, मुकेश पांडेय, चिंताराम कश्यप, अनामिका तिवारी समेत दर्जनों प्रतिनिधि उपस्थित थे।
क्या आगे हो सकता है?
अब निगाहें 23 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां याचिकाकर्ता की ओर से रिज्वाइंडर प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद संभावना है कि कोर्ट मामले का अंतिम निराकरण करे।



