
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन केंद्र सरकार के “ऑपरेशन सिंदूर” पर चर्चा के दौरान सदन में राजनीतिक गर्माहट देखने को मिली।
सत्तापक्ष की ओर से लाया गया अभिनंदन प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित तो हुआ, लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रस्ताव की चर्चा का पूर्ण बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
क्या है “ऑपरेशन सिंदूर”?
“ऑपरेशन सिंदूर” भारत सरकार का एक अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू मिशन था, जिसमें विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का कार्य किया गया। इसमें भारतीय वायुसेना और दूतावासों की अहम भूमिका रही।
मुख्यमंत्री साय का वक्तव्य:
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा:
“यह केवल एक रेस्क्यू मिशन नहीं था, बल्कि यह संपूर्ण राष्ट्र की भावना और प्रतिबद्धता का परिचायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।”
उन्होंने कहा कि भारत अब मानव सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दों पर दृढ़ता से खड़ा है, और आज कोई भी देश भारत को आंख दिखाने से पहले दस बार सोचता है।
विपक्ष का बहिष्कार:
- कांग्रेस विधायकों ने चर्चा के दौरान वॉकआउट किया।
- नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि:
“सीजफायर में अमेरिका की भूमिका रही, लेकिन इस मुद्दे पर विपक्ष से चर्चा नहीं की गई।
बहस का तरीका कटु और टकरावपूर्ण था, इसलिए हमने बहिष्कार का निर्णय लिया।”
महंत ने साथ ही यह भी दोहराया कि कांग्रेस घुसपैठियों के विरोध में पहले भी खड़ी रही है और अब भी उनका यही रुख है।
प्रमुख बिंदु:
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| प्रस्ताव | ऑपरेशन सिंदूर पर अभिनंदन प्रस्ताव |
| प्रस्तुतकर्ता | सत्तापक्ष (अजय चंद्राकर) |
| पारित | ध्वनिमत से |
| विपक्ष का रुख | पूर्ण बहिष्कार, वॉकआउट |
| सीएम की बात | “भारत अब वैश्विक शक्ति, मानव सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध” |
| विपक्ष का आरोप | “सीजफायर और चर्चा में पारदर्शिता की कमी” |
राजनीतिक संकेत:
यह प्रकरण केवल एक सुरक्षा मिशन की सराहना तक सीमित नहीं रहा।
यह आगामी राजनीतिक विमर्श और चुनावी रणनीतियों का संकेत भी देता है —
जहां सरकार राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक नेतृत्व की बात कर रही है, वहीं विपक्ष लोकतांत्रिक संवाद और पारदर्शिता की माँग पर ज़ोर दे रहा है।
