
रायपुर न्यूज धमाका – राज्य सरकार की राजस्व सुधार योजनाओं को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्र सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी के बीच विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में अहम बैठक हुई। इस दौरान भू-अभिलेख प्रणाली को अद्यतन करने, डिजिटल भूमि सर्वेक्षण और लंबित राजस्व मामलों के शीघ्र निराकरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस बैठक में राजस्व मंत्री टंकाराम वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, राजस्व सचिव अविनाश चंपावत, और भू-अभिलेख संचालक विनीत नंदनवार भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री साय ने कहा—
“राज्य सरकार भू-राजस्व दस्तावेजों को पारदर्शी, सटीक और अपडेटेड बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राजस्व रिकॉर्ड जितने व्यवस्थित होंगे, मामलों का निपटारा उतना ही तेज़ और प्रभावी होगा।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि केंद्र सरकार की नवाचारी योजनाओं के साथ पूरी तत्परता और सहयोग से काम करें ताकि किसानों और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके।
केंद्रीय सचिव मनोज जोशी की प्रतिक्रिया
सचिव मनोज जोशी ने कहा—
“छत्तीसगढ़ की भू-अभिलेख प्रणाली अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। डिजिटल तकनीकों से अब भूमि सर्वे तेज़, सटीक और विश्वसनीय हो गया है।”
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है ताकि डिजिटल सर्वे, ऑनलाइन नक्शा अद्यतन, और जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता लाई जा सके।
डिजिटल सर्वे से क्या होगा फायदा?
- ज़मीन की खरीद-बिक्री के दौरान नक्शों का रीअलाइनमेंट आसान होगा।
- शहरी विस्तार और नियोजन अधिक व्यवस्थित रूप से किया जा सकेगा।
- नागरिकों को मिलेगा सटीक, प्रमाणिक और ऑनलाइन नक्शा।
- विवादों और गड़बड़ियों में आएगी कमी।
मुख्य बिंदु:
✅ भू-अभिलेख सुधार में छत्तीसगढ़ अग्रणी
✅ केंद्र सरकार देगी तकनीकी व आर्थिक मदद
✅ राजस्व न्यायालयों के लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने पर जोर
✅ डिजिटल सर्वे और सैटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल पर सहमति
निष्कर्ष:
यह बैठक छत्तीसगढ़ को डिजिटल भूमि अभिलेख प्रणाली में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले महीनों में इसके ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं।
