
सुकमा न्यूज धमाका – जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) की हालत बेहद खराब हो चुकी है। केशलूर से तोंगपाल तक गड्ढों से भरी इस सड़क ने यात्रियों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। स्थिति ऐसी हो गई है कि छोटी गाड़ियां गड्ढों में समा रही हैं और यात्री दंतेवाड़ा होकर लंबा रास्ता अपनाने को मजबूर हैं।
गड्ढों से बेहाल NH-30: क्या है समस्या?
- केशलूर से तोंगपाल तक सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे
- यात्रियों की जान जोखिम में – दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा
- वैकल्पिक मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी
- मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, कुछ गड्ढों में मुरूम डालकर औपचारिकता निभाई गई, जो बारिश में बह चुका है
हरीश कवासी का सरकार पर हमला
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा:
“डबल इंजन की सरकार ने चुनाव के समय फोर लेन और विकास के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन एक राजमार्ग की मरम्मत तक नहीं कर पा रहे। अगर समय रहते स्थाई मरम्मत नहीं हुई तो उग्र आंदोलन होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि:
- सड़कों की दुर्दशा जनता के साथ अन्याय है
- सुकमा-कोंटा मार्ग भी अब जर्जर हो गया है, जिसकी तत्काल मरम्मत आवश्यक है
- बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई
लोगों की सुरक्षा से हो रहा समझौता
- NH-30 से मालवाहक ट्रक, स्कूली बसें, एंबुलेंस आदि नियमित रूप से गुजरती हैं
- गड्ढों की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है
- यात्री खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं
आंदोलन की चेतावनी
“अगर जल्द सड़क मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ, तो हम मजबूरन सड़कों पर उतरेंगे। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और प्रशासन की होगी।”
— हरीश कवासी
जनता की मांगें
- तुरंत प्रभाव से सड़क की स्थायी मरम्मत कार्य शुरू किया जाए
- भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए सड़क की गुणवत्ता में सुधार किया जाए
- सुकमा-कोंटा मार्ग की भी समीक्षा और मरम्मत की जाए
निष्कर्ष
सुकमा जिले का राष्ट्रीय राजमार्ग-30, जो कभी आवागमन की जीवनरेखा था, अब जनता की परेशानी का कारण बन गया है। सरकार यदि समय रहते गंभीरता नहीं दिखाती, तो यह जन असंतोष सड़क पर आंदोलन का रूप ले सकता है।
