
बेमेतरा न्यूज धमाका – सामाजिक सेवा की सबसे सुंदर परिभाषा तब सामने आती है जब कोई व्यक्ति अपने निजी दुख को जनकल्याण में बदल दे। साजा विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला रानो में कार्यरत नवाचारी शिक्षिका प्रतीक जैन ने अपने स्वर्गीय पिता मोतीचंद संचेती की स्मृति को समाज-सेवा में बदलते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
तीन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी
शिक्षिका प्रतीक जैन ने तीन जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का पूर्ण भार उठाया है:
- देवपीका साहू – एक होनहार छात्रा जो शैक्षणिक और सहगामी गतिविधियों में सक्रिय रही है।
- नीलेश वर्मा – नवप्रवेशी छात्र, जिसने कोविड काल में अपने पिता को खोया और आर्थिक संकट में है।
- केसर वर्मा – जिनके पिता का निधन कैंसर से हुआ। वह पहले से प्रतीक जैन द्वारा गोद ली गई छात्रा हैं।
क्या दिया गया?
प्रतीक जैन ने इन बच्चों को वर्ष 2025–26 के पूरे शैक्षणिक सत्र के लिए निम्न सुविधाएँ प्रदान कीं:
- पाठ्यपुस्तकें
- कॉपियां और जिल्द
- स्कूल बैग
- कंपास बॉक्स
- पेन, बोतल व अन्य आवश्यक सामग्री
इस पहल से न केवल इन बच्चों की शिक्षा जारी रहेगी, बल्कि आत्म-सम्मान और भविष्य की आशा भी सशक्त होगी।
विद्यालय परिसर में आयोजित हुआ कार्यक्रम
इस अवसर पर विद्यालय में एक साधारण परंतु भावनात्मक कार्यक्रम हुआ, जिसमें प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
- प्राचार्य द्वारिका राम वर्मा
- प्रधान पाठक किशुन राम साहू
- कर्मचारीगण: शंकर वर्मा और प्रेमनारायण साहू
- समस्त शिक्षक व विद्यार्थीगण
सामाजिक सरोकार की मिसाल
गांव में इस पहल की चहुं ओर प्रशंसा हो रही है। बच्चों के पालकों ने शिक्षिका को दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने न केवल एक शिक्षक की भूमिका निभाई, बल्कि एक मार्गदर्शक और संरक्षक के रूप में भी समाज के सामने आदर्श रखा।
“शिक्षक सिर्फ पठन-पाठन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला दीपस्तंभ होता है,” यह कथन प्रतीक जैन ने अपने सेवा-भाव से चरितार्थ कर दिखाया है।
समाप्ति: समाज के लिए प्रेरणा
शिक्षिका प्रतीक जैन की यह पहल न सिर्फ मानवता का परिचायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि व्यक्तिगत स्मृतियाँ, यदि समाजहित में बदली जाएँ, तो वह प्रेरणा बन जाती हैं। उनकी यह सेवा निश्चित रूप से अन्य शिक्षकों, युवाओं और नागरिकों को भी समाज के लिए कुछ कर गुजरने की दिशा में प्रेरित करेगी।



