
बिलासपुर न्यूज़ धमाका – युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर तीन शिक्षकों—चंद्रभान वर्मा, अपर्णा त्रिपाठी और गायत्री वर्मा—ने बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की एकल पीठ में हुई, जिसमें कोर्ट ने शिक्षकों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
शिक्षकों का आरोप: सीनियर को बनाया अतिशेष, जूनियर को किया संरक्षित
याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि युक्तियुक्तकरण आदेश 02-08-2024 के खंड 7(सी)(3) का उल्लंघन करते हुए उन्हें अतिशेष घोषित किया गया, जबकि वे अपने विद्यालयों में वरिष्ठतम शिक्षक हैं। अधिकारियों ने जूनियर और अपने करीबी शिक्षकों को बचाने के लिए नियमों के विरुद्ध निर्णय लिया।
कोर्ट की टिप्पणी और निर्देश
सुनवाई के पश्चात कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को डिविजनल युक्तियुक्तकरण समिति के समक्ष 25 जून 2025 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। समिति को आदेश दिया गया है कि वह 7 दिनों के भीतर, विशेष रूप से खंड 7(सी)(3) के अनुसार, कानून सम्मत निर्णय ले।
राज्य शासन की दलील
राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय ने कोर्ट को अवगत कराया कि शिक्षकों का स्थानांतरण युक्तियुक्तकरण के नियमानुसार उचित सत्यापन के बाद किया गया है। यदि याचिकाकर्ताओं को आपत्ति है, तो वे संभागीय समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने जिन अधिकारियों को बनाया पक्षकार:
- सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
- निदेशक, लोक शिक्षण संचालनालय
- संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर
- जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर
- विकासखंड शिक्षा अधिकारी, धरसींवा
निष्कर्ष:
हाई कोर्ट का यह निर्देश युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़ा करता है। अब सभी की नजर 25 जून को समिति के समक्ष प्रस्तुत होने और एक सप्ताह के भीतर निर्णय आने पर टिकी रहेगी। यह मामला प्रदेश में शिक्षकों के स्थानांतरण प्रक्रिया की समीक्षा और सुधार की दिशा में एक संकेत भी माना जा सकता है।


