
ग्वालियर-हाई कोर्ट की एकल पीठ में राज्य शासन ने उस रिपोर्ट को पेश कर दिया, जिसे फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए गठित किया था। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरपोर्ट के पास 50 एकड़ जमीन व भवन उपलब्ध कराकर केंद्र शासन को यूनिवर्सिटी खोलने की अनुशंसा कर दी है। यूनिवर्सिटी खोलने पर पूर्ण सहमित बन चुकी है। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने की। वहीं दूसरी ओर आरोपित को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
भरत जाटव पर शिवपुरी जिले के बदरवास थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज है। उसकी पहली जमानत याचिका डीएनए रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दी थी। उसने चौथी बार जमानत याचिका दायर की है। इस याचिका का निर्धारण किया जाना है। वर्तमान में डीएनए रिपोर्ट के लिए भोपाल व सागर लैब पर निर्भर रहना पड़ता है। इन रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय खोलने का सुझाव दिया था। विश्वविद्यालय खुलने से नए वैज्ञानिक तैयार होंगे और नई तकनीक भी इजाद होगी, लेकिन शासन ने इस दिशा में कार्य नहीं किया। कोर्ट ने फिर से यह याद दिलाया है। कोर्ट ने कहा कि अभी डीएनए सैंपल व फोरेंसिक साइंस एक्जामिनेशन को जांच में शामिल किया जा रहा है। जबकि तकनीक इससे कहीं ज्यादा आगे निकल चुकी है। इस मामले में गृह विभाग के प्रमुख सचिव सहित डीजीपी तलब हुए थे। उन्होंने कोर्ट को कमेटी बनाने की जानकारी दी। कमेटी ने फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनाने के लिए अपना अध्ययन किया। इसके बाद रिपोर्ट हाई कोर्ट में सौंपी। गृह विभाग के सचिव ने रिपोर्ट में बताया कि यूनिवर्सिटी की अनुशंसा कर दी है। इसके खुलने से प्रत्येक थाना स्तर पर एफएसएल टीम तैनात रह सकेगी। अनुभाग स्तर पर एसएफएल लैब हो सकेगी। अपराध घटित होने पर 24 से 48 घंटे में एफएसएल रिपोर्ट मिल सकेगी। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री ने दिसंबर 2020 में बेहतर पुलिसिंग की व्यवस्था करने के लिए फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी खोलने की सलाह भी दी थी। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने आरोपित को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।



