
धमतरी न्यूज़ धमाका – धमतरी जिले के शांत ग्रामीण इलाकों में पनप रहे साइबर अपराध और संदिग्ध गतिविधियों की आहट मिलते ही पुलिस ने एक व्यापक ‘काउंटर-ऑपरेशन’ शुरू किया है।
धमतरी जिले के शांत ग्रामीण इलाकों में पनप रहे साइबर अपराध और संदिग्ध गतिविधियों की आहट मिलते ही पुलिस ने एक व्यापक ‘काउंटर-ऑपरेशन’ शुरू किया है। इस विशेष अभियान का नाम पुलिस की चौपाल है लेकिन अंदरूनी हकीकत यह है कि यह सिर्फ अफसरों की बैठक नहीं, बल्कि गांवों में पुलिस के थर्ड-आई और मुखबिर तंत्र को पुनर्जीवित करने का एक रणनीतिक ब्लूप्रिंट है।
कोटवार-पटेल बनेंगे ‘सीक्रेट एजेंट
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सभी थाना क्षेत्रों में कोटवारों, पटेलों और ग्रामीणों की बैठकें ली जा रही हैं। पुलिस ने अब ‘इनाम और सम्मान’ की नीति अपनाई है। घोषणा की गई है कि सटीक सूचना देकर अपराध रुकवाने वाले ग्रामीणों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानितकिया जाएगा। इसे गांवों में दम तोड़ चुके मुखबिर नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की कवायद माना जा रहा है।
1 रडार पर बाहरी लोग और ‘APK’ का जाल : पुलिस का सबसे ज्यादा फोकस ग्रामीण इलाकों में बिना रिकॉर्ड के रहने वालों पर है।
2 फेरीवाले और किरायेदार : गांव में आने वाले हर बाहरी व्यक्ति की जानकारी दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
3 तंबू-डेरा और रात्रि गश्त : बिना सूचना सरहद पर डेरा डालने वालों पर नजर रहेगी और मंदिरों के पास रात्रि गश्त बढ़ेगी।
4 डिजिटल डाकू : ग्रामीणों को मोबाइल पर आने वाले अनजान कॉल, फर्जी लिंक और खासकर APK फाइल्स (हैकिंग सॉफ्टवेयर) से बचने की कड़क चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही नशा मुक्ति और मालवाहक वाहनों में सवारी न बैठाने की भी हिदायत दी गई।
5 बड़ा सवाल : पुलिस का यह जनसहभागिता मॉडल कागजों पर मजबूत है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ अपीलों से शातिर अपराधी रुकेंगे? या फिर इसके लिए पुलिस को जमीन पर उतरकर लगातार रेड और सख्त कानूनी कार्रवाई की रफ्तार भी दोगुनी करनी होगी?



