
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के नाम पर की गई मनमानी और भेदभाव को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पाली ब्लॉक की वरिष्ठ शिक्षिका फाल्गुनी यादव को अनुचित रूप से अतिशेष घोषित कर दूरस्थ स्कूल में पदस्थ करने के आदेश को कोर्ट ने अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है।
वरिष्ठ को हटाकर कनिष्ठ को बचाया गया
मामला शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, रतिजा से जुड़ा है, जहां कला विषय की शिक्षिका फाल्गुनी यादव (कार्यभार ग्रहण: 30 अप्रैल 2013) को अतिशेष घोषित कर दिया गया, जबकि उनसे 5 साल कनिष्ठ शिक्षिका महिमा प्रतिभा तिर्की (कार्यभार: 16 अगस्त 2017) को युक्तियुक्तकरण से बाहर रखा गया।
हैरत की बात यह रही कि फाल्गुनी को जिस विषय में अतिशेष दिखाया गया, वह विषय उन्होंने पढ़ाया ही नहीं। उन्हें हिंदी विषय के शिक्षकों की सूची में डालकर नियमों की अनदेखी की गई।
हाई कोर्ट ने दी राहत, लगाया डीईओ के आदेश पर रोक
फाल्गुनी यादव ने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां कोर्ट ने 19 जून 2025 को युक्तियुक्तकरण समिति के समक्ष उन्हें अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। साथ ही तब तक उनके स्थानांतरण पर रोक लगाने का आदेश दिया।
अभ्यावेदन में खोली पोल
फाल्गुनी ने कलेक्टर को सौंपे गए अभ्यावेदन में आरोप लगाया कि काउंसलिंग के दौरान उन पर दबाव बनाकर दूरस्थ स्कूल का चयन करवाया गया, जबकि पास के रिक्त पदों को सूची में जानबूझकर शामिल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014-15 में उन्हें एक बार अतिशेष बताकर गणित विषय में समायोजित किया गया था, अब फिर उन्हें हिंदी विषय में अतिशेष बताकर स्थानांतरण कर दिया गया।
आदेश रद्द, अब होगी दोबारा कार्रवाई
जिला प्रशासन ने फाल्गुनी यादव का अभ्यावेदन स्वीकार करते हुए उनके स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया है। वहीं, अब कनिष्ठ शिक्षिका महिमा प्रतिभा तिर्की के खिलाफ युक्तियुक्तकरण की पुनः कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
निष्कर्ष
यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। युक्तियुक्तकरण के नाम पर नियमों की अनदेखी और अपने लोगों को बचाने का खेल उजागर हो चुका है। शिक्षिका के हाई कोर्ट जाने के साहस ने न केवल उन्हें न्याय दिलाया, बल्कि विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


