
रायपुर न्यूज धमाका – जयस्तंभ चौक से शास्त्री चौक तक प्रस्तावित स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। लगभग 8 साल से अधर में लटके इस परियोजना को लेकर राज्य शासन ने ₹37.75 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। परियोजना के पुनः शुरू होते ही कांग्रेस ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
“यह स्काई वॉक नहीं, कमीशन वॉक है” – दीपक बैज
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस परियोजना को लेकर तीखा हमला बोला। उनका कहना है:
“शहर में पैदल चलने वालों की संख्या घट रही है। ऐसे में स्काईवॉक नहीं, फ्लाईओवर की जरूरत है। ये स्काईवॉक नहीं, कमीशन वॉक है। यह सिर्फ पैसा खाने का ज़रिया था।”
उन्होंने पूर्व मंत्री राजेश मूणत को भी आड़े हाथों लिया और इस प्रोजेक्ट को लेकर भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया।
अवैध कब्जों पर भी निशाना
बैज ने हाल ही में कौशल्या विहार में अवैध कब्जों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए:
“सिर्फ गरीबों के घर गिराए जा रहे हैं। आधा रायपुर बीजेपी नेताओं के कब्जे में है, क्या उनके निर्माण गिराए जाएंगे?”
सुशासन तिहार पर भी तंज
राज्य सरकार द्वारा मनाए जा रहे “सुशासन तिहार” को बैज ने “टाइम पास प्रोग्राम” बताते हुए कहा:
“सरकार के पास न नीति है, न योजना, और न ही पैसा। सारे मंत्री रेत खनन में लगे हैं। नाकामी छुपाने के लिए अब अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है।”
बस्तर पर गृह मंत्री के बयान को बताया ‘अज्ञानता’
गृह मंत्री विजय शर्मा के “देश के एक-एक इंच पर संविधान लागू होगा” बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बैज ने कहा:
“शायद उन्हें मालूम नहीं कि बस्तर पांचवीं अनुसूची का क्षेत्र है। यहां ग्रामसभाएं सर्वोपरि हैं। पहले वे संविधान पढ़ लें, फिर बयान दें।”
पृष्ठभूमि: क्या है स्काईवॉक प्रोजेक्ट?
- शुरुआत: 2016 में पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने की थी
- लंबाई: लगभग 1 किलोमीटर
- उद्देश्य: ट्रैफिक भीड़ से बचाने के लिए पैदल यात्रियों हेतु एलिवेटेड वॉकवे
- स्थिति: निर्माण अधूरा, वर्षों से रुका हुआ
- विवाद: भ्रष्टाचार, योजना की उपयोगिता और फंडिंग पर लगातार सवाल
निष्कर्ष
एक तरफ सरकार विकास का चेहरा दिखाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे घोटाले का रास्ता बता रहा है। स्काईवॉक जैसे प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की सियासत के स्काईलेवल तक पहुंच चुके हैं, जहां अब पैदल चलने की बजाय आरोप-प्रत्यारोपों की रफ्तार तेज़ है।



