
कोरबा न्यूज धमाका – मध्यप्रदेश के सिंगरौली में कोरबा निवासी एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतका के परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस पर लापरवाही और FIR में दुष्कर्म की धाराएं न जोड़ने का आरोप लगाते हुए, परिजनों ने शव के साथ आमगांव चौक (हरदीबाजार) में सड़क जाम कर दिया।
वहीं मौके पर पहुंची कोरबा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या है मामला?
- मृतका पुष्पांजलि दास, कोरबा जिले के हरदीबाजार की रहने वाली थी।
- वह अपनी मां के साथ सिंगरौली (म.प्र.) में रहती थी, जहां उसकी मां अनुकंपा नियुक्ति पर कार्यरत हैं।
- कुछ दिन पहले उसकी बड़ी बहन, जो भोपाल में पढ़ाई कर रही है, सिंगरौली स्थित घर लौटी तो घर में पुष्पांजलि की नग्न अवस्था में लाश पड़ी मिली।
- शरीर पर विशेषकर गुप्तांगों पर चोट के निशान मिले, जिससे परिजनों को दुष्कर्म की आशंका हुई।
परिजनों का आरोप
- परिजनों का कहना है कि उन्होंने मोरवा थाना (सिंगरौली) में हत्या की शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने बलात्कार की धारा जोड़ने से मना कर दिया।
- परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें थाने से भगा दिया।
- न्याय की मांग को लेकर वे शव को कोरबा लाए, और फिर हरदीबाजार के आमगांव चौक पर सड़क जाम कर दिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
- घटना की सूचना मिलते ही कोरबा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।
- पुलिस ने बताया है कि सिंगरौली में मामला दर्ज है, लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस पूरे प्रकरण पर मध्यप्रदेश प्रशासन से संपर्क कर रही है।
- वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
सवाल उठते हैं:
- क्या दुष्कर्म की धाराएं जानबूझकर नहीं जोड़ी गईं?
- क्या पुलिस ने परिजनों को उचित सुनवाई नहीं दी?
- क्या लड़की की मौत को दबाने का प्रयास हो रहा है?
संवेदनशील बिंदु
- युवती की मौत के पीछे अगर अपराध है, तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
- परिजनों को न्याय मिले, इसके लिए MP और CG पुलिस की समन्वित जांच जरूरी है।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल एक युवती की मौत नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही, पीड़ितों की आवाज़, और न्याय प्रणाली की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। समाज, प्रशासन और मीडिया – तीनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लें और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।


