
बीजापुर न्यूज धमाका – नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सड़क निर्माण घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या की SIT जांच के दौरान पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें दो सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता (EE), एक वर्तमान EE, एक SDO और एक सब-इंजीनियर शामिल हैं।
जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि की है। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है और उनसे पूछताछ जारी है।
जांच में क्या सामने आया?
SIT ने जब गंगालूर से मिरतुर तक बन रही सड़क के निर्माण कार्य की जांच शुरू की, तो भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के प्रमाण सामने आए। यह वही परियोजना है, जिसे पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने अपनी रिपोर्टिंग में बार-बार उजागर किया था।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कराया गया था, जिसकी शिकायत मुकेश चंद्राकर लगातार कर रहे थे।
हत्याकांड की कड़ी इस घोटाले से जुड़ी
1 जनवरी की रात से लापता पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव 3 जनवरी को रिश्तेदार और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के मजदूरों के लिए बने सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ था। पुलिस पहले ही सुरेश, रितेश और दिनेश चंद्राकर सहित सुपरवाइज़र महेंद्र रामटेके को गिरफ्तार कर चुकी है।
अब SIT की जांच में खुलासा हुआ है कि सड़क घोटाले में मुकेश की भूमिका से पीडब्ल्यूडी के अफसरों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिससे हत्या के पीछे के आर्थिक कारण और गहरे हो गए हैं।
73 करोड़ की परियोजना, गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
गंगालूर-मिरतुर सड़क परियोजना को वर्ष 2010 में ₹73.08 करोड़ की लागत से मंजूरी दी गई थी। पर मुकेश चंद्राकर की रिपोर्टिंग के अनुसार, इसमें घटिया निर्माण और पैसों की जमकर बंदरबांट की गई। उन्होंने इस घोटाले को न केवल स्थानीय स्तर पर उजागर किया, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यम से जनता तक लगातार आवाज़ पहुंचाई।
मुकेश चंद्राकर: नक्सल ज़ोन में निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल
मुकेश केवल एक पत्रकार नहीं थे, वे साहस, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक थे। 2021 के टकलगुड़ा माओवादी हमले के बाद जब कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास माओवादियों की कैद में थे, तब उनकी रिहाई सुनिश्चित कराने में भी मुकेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
क्या अब होगा सिस्टम का शुद्धिकरण?
इस कार्रवाई के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है –
क्या अब इस सड़क घोटाले में शामिल बड़े रसूखदारों पर भी कार्रवाई होगी?
क्या मीडिया को सच दिखाने की सजा मौत नहीं होगी?
मुकेश चंद्राकर की हत्या न केवल एक निर्भीक पत्रकार की जान लेना है, बल्कि यह लोकतंत्र की आवाज़ दबाने की कोशिश भी है। अब जब SIT जांच में भ्रष्टाचार की कड़ी स्पष्ट हो रही है, राज्य सरकार और न्याय व्यवस्था से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद है।
