
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) द्वारा राज्य के 19 जिलों में बनाए गए करीब 3 हजार मकानों को खरीददार नहीं मिल रहे हैं। राज्य सरकार ने इन मकानों को बेचने के लिए 10% से 30% तक छूट देने का फैसला लिया, लेकिन इसके बावजूद अब भी 1700 मकान खाली हैं।
मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव के अनुसार, 2900 में से 900 मकान बिक चुके हैं, और 300 की बुकिंग हुई है, पर अब भी लगभग 60% मकान खाली पड़े हैं। लोगों की रुचि खासकर शहरों से दूर बने मकानों में नहीं है, जो इस संकट का मुख्य कारण है।
शहर से दूर मकानों में नहीं दिख रही रुचि
हाउसिंग बोर्ड द्वारा बनाए गए अधिकांश मकान आउटर एरिया यानी शहरों से दूर स्थित हैं, जहां न तो बेहतर परिवहन सुविधा है और न ही बुनियादी सुविधाएं। यही कारण है कि कम कीमत या भारी छूट के बावजूद भी लोग इन मकानों की ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर, नया रायपुर में बने मकानों की स्थिति बेहद खराब है।
- सेक्टर 29 में 154 मकान (11 लाख – 1 करोड़ रुपये)
- सेक्टर 27 में 67 मकान (12.26 लाख – 4 करोड़ रुपये)
- सेक्टर 12 में 525 मकान (16.76 लाख – 85.47 लाख रुपये)
- बोरियाकला में 300+ मकान खंडहर हो चुके हैं (17.23 लाख – 22.93 लाख रुपये)
बोरियाकला, सेजबहार और सड्ड जैसे क्षेत्रों में कई दुकानें भी खाली पड़ी हैं, जिनमें 29 दुकानें बोरियाकला में हैं, लेकिन इनमें कोई रुचि नहीं दिखा रहा।
कम कीमत के अटल आवास भी नहीं बिक रहे
हाउसिंग बोर्ड ने जिन क्षेत्रों में कम आय वर्ग (EWS) के लिए अटल आवास योजना के अंतर्गत मकान बनाए, वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है:
- बीजापुर: 143 खाली मकान (8.97 लाख – 24 लाख)
- धमतरी: 88 मकान (7.72 लाख – 27.45 लाख)
- नवापारा: 122 मकान (7.41 लाख – 31.05 लाख)
- राजिम: 53 मकान (7.91 लाख – 29.52 लाख)
- बालोद: 118 मकान (7.27 लाख – 25.71 लाख)
- सिवनी (बालोद): 45 मकान (5.41 लाख – 32.90 लाख)
- भानुप्रतापपुर: 60 मकान (6.75 लाख – 6.86 लाख)
आगे की योजना: ब्लॉक स्तर पर मकान निर्माण
मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने बताया कि आने वाले समय में ब्लॉक स्तर पर मकान बनाए जाएंगे, ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर विकल्प मिल सकें। साथ ही, दीपावली तक नई योजनाएं लॉन्च करने की तैयारी भी चल रही है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सिर्फ मकान बना देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी स्थान, सुविधा और कीमत को लेकर व्यवहारिक योजना बनाना जरूरी होता है। सरकार के छूट देने के बावजूद मकान न बिकना नीतिगत पुनर्विचार की माँग करता है।



