
बालोद न्यूज धमाका – जिले के डौंडी ब्लॉक में युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के तहत शिक्षिका को हटाए जाने से नाराज ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड़ दिया और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला शासकीय प्राथमिक शाला गिधाली और प्राथमिक शाला धोतिमटोला से जुड़ा है, जहां स्कूल के पहले ही दिन शैक्षणिक अव्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर नाराजगी जताई।
क्या है पूरा मामला?
डौंडी ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला गिधाली में पहले तीन शिक्षक कार्यरत थे – जिनमें एक दिव्यांग, एक दृष्टिबाधित और एक सामान्य शिक्षिका थीं। युक्तियुक्तकरण के तहत सामान्य शिक्षिका का स्थानांतरण कर दिया गया। अब स्कूल में केवल दृष्टिबाधित और दिव्यांग शिक्षक ही रह गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना असंभव हो जाएगा। वे मानते हैं कि यह निर्णय बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
दूसरी ओर, प्राथमिक शाला धोतिमटोला में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी थी, जिसे लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने स्कूल के गेट पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया और बच्चों के साथ स्कूल के बाहर बैठ गए।
ग्रामीणों की मांगें और प्रशासन से अपील
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक स्कूल में पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक नियुक्त नहीं किए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा। उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
स्थानीय जिला पंचायत सदस्य मिथलेश निरोटी ने इस घटना को आदिवासी क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न बताया और कहा कि शासन को तत्काल संज्ञान लेकर स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की पदस्थापना करनी चाहिए।
निष्कर्ष
शिक्षकों की कमी और युक्तियुक्तकरण के फैसले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि नीतियों का जमीनी असर किस हद तक गंभीर हो सकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का ढांचा और अधिक संकट में आ सकता है।



