
12 जून 2026 //
पश्चिम बंगाल न्यूज़ धमाका – पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान और असंतोष ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक टीएमसी के संसदीय और विधायी दल में ऐसी भगदड़ मची है, जिसकी कल्पना खुद पार्टी आलाकमान ने भी नहीं की थी।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार, सांसद और विधायक एक-एक कर पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। इस महासंकट के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि संसद और बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के पास आखिर कितनी ताकत बची है।
लोकसभा में बगावत और सांसदों का पूरा गणित
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 सीटों में से 29 पर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। बाद में बशीरहाट के सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद पार्टी के पास 28 सांसद बचे थे। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन 28 सांसदों में से रिकॉर्ड 19 लोकसभा सांसद पूरी तरह बागी हो चुके हैं। इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बाकायदा एक लिखित पत्र सौंपकर सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था और एनडीए (NDA) को समर्थन देने का बड़ा फैसला सुनाया है।

इस बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। इस विद्रोही फेहरिस्त में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीलुर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, बापी हलधर, सयानी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी (देव), कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। इन 19 सांसदों की बगावत के बाद अब लोकसभा में ममता बनर्जी के साथ केवल 9 सांसद ही शेष बचे हैं, जिनमें कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मंडल, सुदीप बंदोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद शामिल हैं।
विधानसभा और राज्यसभा में भी भारी नुकसान
लोकसभा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर भी टीएमसी पूरी तरह से दोफाड़ हो चुकी है। राज्य के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर कुल 80 विधायक जीतकर आए थे। इनमें से ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पहले ही ममता बनर्जी ने अनुशासनहीनता के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद टीएमसी के 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया, जिसमें कुछ अन्य विधायकों के जुड़ने के बाद अब बागी विधायकों की कुल संख्या 65 पहुंच चुकी है।
संसद से विधानसभा तक हलचल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह असंतोष आगे भी जारी रहा, तो इसका असर संसद और विधानसभा दोनों स्तरों पर दिखाई दे सकता है। विपक्षी दल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इसे सत्ताधारी दल की कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
ममता बनर्जी के लिए बढ़ी चुनौती
मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व में टीएमसी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में मजबूत स्थिति में रही है। हालांकि पार्टी के भीतर उभर रहे मतभेद आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।



