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चार जवानों की हत्या करने वाले कांस्टेबल की अपील खारिज, हाई कोर्ट ने कहा- “तनाव कत्ल का लाइसेंस नहीं”

बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सीआरपीएफ के जवान संतराम द्वारा दायर उस आपराधिक अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने चार सहकर्मियों की हत्या के मामले में मिली आजन्म कारावास की सजा को चुनौती दी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि तनाव या छुट्टी न मिलना, किसी को हत्या करने का अधिकार नहीं देता।


क्या था मामला?

वर्ष 2022 में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात सीआरपीएफ की 168वीं बटालियन के कांस्टेबल संतराम ने छुट्टी न मिलने और ड्यूटी को लेकर हुए विवाद के चलते सब-इंस्पेक्टर विक्की शर्मा सहित तीन अन्य जवानों की कैंप के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी थी, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था।

आरोपी ने इस वारदात को एके-47 सहित दो सर्विस राइफलों से अंजाम दिया था।


हाई कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा:

“नक्सल क्षेत्र में कठिन हालात और छुट्टी न मिलना जवानों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है, परंतु यह किसी को अपने साथियों को गोलियों से भूनने का अधिकार नहीं देता।”

बेंच ने यह भी कहा कि सशस्त्र बलों के जवान अनुशासन और नियंत्रण के साथ काम करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं और इस तरह की अमानवीय घटना किसी भी दृष्टिकोण से क्षम्य नहीं है।


पूर्व नियोजित थी हत्या: कोर्ट

हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संतराम दो राइफल लेकर गया था, जो सामान्य प्रक्रिया नहीं है। इससे यह प्रतीत होता है कि हत्या की पूर्व नियोजित योजना थी। घटना के दिन वह अधिकारियों के विश्राम कक्ष में गया और वहां अंधाधुंध फायरिंग की।

गवाही और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया था, जिसे हाई कोर्ट ने भी पूर्णतः न्यायोचित करार दिया।


क्या था रंजिश का कारण?

कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेज़ों और गवाहों के अनुसार, सब इंस्पेक्टर विक्की शर्मा ने संतराम का नाम एक विशेष प्रशिक्षण (डॉग हैंडलर कोर्स) के लिए भेजा था, जिससे उसकी छुट्टी रद्द हो गई थी। इसी को लेकर आरोपी अफसर और अन्य जवानों से नाराज था और इसी रंजिश के चलते उसने यह भयावह कदम उठाया।


हाई कोर्ट की स्पष्ट चेतावनी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

“यदि हर तनावग्रस्त जवान इस तरह की प्रतिक्रिया देने लगे, तो बल के भीतर अनुशासन और सुरक्षा दोनों ही खतरे में पड़ जाएंगे।”


ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार

दंतेवाड़ा की विशेष नक्सल अदालत ने संतराम को आईपीसी की धारा 302, 307, एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25(1B)(A) और 27(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने इसे पूर्ण रूप से विधिसंगत माना और अपील खारिज कर दी।


निष्कर्ष: अनुशासन सर्वोपरि

यह मामला सशस्त्र बलों में मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और कार्यस्थल पर दबाव से जुड़ी गंभीर बहस को जन्म देता है, लेकिन अदालत का स्पष्ट संदेश है—”तनाव कत्ल का कारण नहीं बन सकता, कानून सबके लिए समान है।”

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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