
रायपुर न्यूज धमाका – राज्य सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने और कृषि क्षेत्र में पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘कृषक उन्नति योजना’ के क्रियान्वयन के लिए नवीन दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों, संभागीय आयुक्तों, पंजीयक सहकारी संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों को निर्देशात्मक पत्र भेजा गया है।
योजना के मुख्य उद्देश्य:
- कास्त लागत में कमी लाना
- फसल विविधिकरण को बढ़ावा देना
- दलहन-तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल (कोदो, कुटकी, रागी) एवं कपास को प्रोत्साहन देना
- किसानों को आदान सहायता राशि उपलब्ध कराना
किसे मिलेगा योजना का लाभ:
- केवल एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत किसान
- जिन्होंने खरीफ सीजन में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों या बीज निगम को धान/धान बीज विक्रय किया हो
- जो कृषक धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें लेने हेतु पंजीकृत हैं
प्रमुख सहायता राशि विवरण:
| फसल/परिस्थिति | सहायता राशि (रु.) प्रति एकड़ |
|---|---|
| धान (कॉमन) | 15,351/- (731 रु./क्विंटल) |
| धान (ग्रेड-A) | 14,931/- (711 रु./क्विंटल) |
| धान की जगह अन्य खरीफ फसल | 11,000/- |
| दलहन/तिलहन/मक्का/लघु धान्य/कपास | 10,000/- |
भुगतान की प्रक्रिया:
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से कृषकों के बैंक खातों में राशि का भुगतान किया जाएगा
- पात्रता की पुष्टि गिरदावरी सत्यापन और फसल पंजीयन के आधार पर होगी
- योजना के तहत निजी कंपनियों, ट्रस्ट, मंडल, सरकारी संस्थानों को लाभ नहीं मिलेगा
लेखा संधारण और जवाबदेही:
- मार्कफेड और राज्य बीज निगम द्वारा संधारित किया जाएगा व्यय का विस्तृत लेखा-जोखा
- प्रबंध संचालकों को एक माह के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य
- संचालक कृषि योजना के क्रियान्वयन, समीक्षा और वितरण की निगरानी करेंगे
सरकार का उद्देश्य:
राज्य सरकार ने इस योजना के ज़रिए वर्षा आधारित कृषि व्यवस्था से जूझ रहे किसानों को आर्थिक सुरक्षा और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का अवसर देने का संकल्प जताया है। यह योजना कृषकों की आय बढ़ाने, लागत घटाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम साबित हो सकती है।
