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छत्तीसगढ़ में करंट से हो रही हाथियों की मौत, अब तक 18 हाथियों की गई जान

 बिलासपुर न्यूज धमाका – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़े तो और भी चौंकाने वाले हैं। देशभर से इकट्ठा किए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के वन क्षेत्रों में स्वच्छंद विचरण करने वाले गजराज पर बिजली का करंट काल बनकर टूट रहा है।

बिजली करंट से मौत का यह सिलसिला वर्ष 2013-14 से कुछ ज्यादा ही प्रारंभ हुआ है। इस दौर में पूरे एक साल में चार हाथियों की मौत करंट से हुई थी। करंट से मौत लगातार हो ही रही है। इसे रोकने के लिए उपाय तो किए जा रहे हैं पर प्रभावी जान नहीं पड़ रहा है। तभी तो वर्ष 2019-20 में तीन हाथियों की मौत हो गई। बिजली करंट से मौत के मामले में रायगढ़ जिले का आंकड़ा कम चौंकाने वाला नहीं है। वर्ष 2023 में 12 हाथियों की मौत करंट की चपेट में आने से हुई। बता दें कि रायगढ़ जिले में कटहल बड़ी संख्या में मिलता है। जंगल के अलावा धरमजयगढ़ से लेकर रायगढ़ जिले के ग्रामीण इलाके में ग्रामीणों की बाड़ी में कटहल का पेड़ मिल ही जाता है। कटहल हाथियों का प्रिय भोजन है। इसकी खुशबू से हाथी चले आते हैं। हाथियों की धमक और ग्रामीणों में जान का भय ही ग्रामीणों के सामने तब करंट ही एक बड़ा और सशक्त विकल्प नजर आता है। बिजली करंट से अपने आपको बचाकर हाथियों को मौत के मुंह में धकेलने का काम कर रहे हैं। तभी तो यह आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ते ही जा रहा है।

रायगढ़ जिले का यह इलाका खतरनाक

रायगढ़ जिले के लैलूंगा, छाल,धरमजयगढ़ व बाकारूमा वन परिक्षेत्र में हाथियों की धमक साल भर बनी रहती है। धान की फसल के बाद महुआ और कटहल खाने के लिए हाथियों का दल यहां विचरण करते रहता है। यही वह इलाका है जहां बिजली करंट से हाथियों की मौत भी ज्यादा होती है। मौजूदा साल में अब तक छह हाथियों की मौत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और सरगुजा संभाग के साथ ही धमतरी जिले में भी बिजली करंट से हाथियों के मौत का आंकड़ा कम चौंकाने वाला नहीं है।

तमनार रेंज मे तीन हाथियों की मौत,हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

26 अक्टूबर को रायगढ़ जिले के तमनार में करंट से तीन हाथियों की मौत हो गई। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वत: संज्ञान में लेकर पीआईएल के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस ने सीएसपीडीसीएल के एमडी और उर्जा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।.

कांसाबेल में एक हाथी की मौत

जशपुर जिले के कांसाबेल वन परिक्षेत्र में एक हाथी की मौत करंट से हुई है। बीते वर्ष 28 दिसंबर को बगीचा वन परिक्षेत्र के कुरडेग में करंट से एक हाथी की मौत हो गई थी।

ये आंकड़े भी भयावह

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि देश के अलग-अलग राज्यों में रेल दुर्घटनाओं में 200 हाथी मारे गए. इसी तरह इस दौरान 223 हाथियों को शिकार के लिए मारा गया. इन राज्यों में 72 हाथियों को ज़हर देकर मार डाला गया. लेकिन इन सारे आंकड़ों की तुलना में, करंट से हाथियों की मौत के आंकड़े लगभग दोगुने हैं. वन विभाग के अनुसार इस दौरान देश में 790 हाथी करंट लगने से मारे गए हैं।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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