

रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित ₹2161 करोड़ के शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) ने बड़ा कदम उठाते हुए 1100 पन्नों की चार्जशीट विशेष कोर्ट में दाखिल की है। यह इस मामले में चौथा पूरक चालान है, जिसमें लखमा की घोटाले में ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
चार्जशीट के साथ संलग्न 66 पन्नों की समरी रिपोर्ट में संपूर्ण प्रकरण का विवरण और लखमा की संलिप्तता को रेखांकित किया गया है।
कवासी लखमा की गिरफ्तारी और रिमांड:
पूर्व मंत्री 21 जनवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने उन्हें 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था, जिसके पहले उनसे दो बार पूछताछ की गई थी। गिरफ्तारी से पूर्व 7 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर भी रखा गया था।
क्या है शराब घोटाले का मामला?
यह घोटाला 2017 से 2022 के बीच हुआ बताया गया है, जिसमें राज्य की आबकारी नीति में बदलाव कर भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दिया गया। CSMCL के माध्यम से शराब बिक्री की प्रक्रिया को नियंत्रित कर कथित रूप से अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक आपराधिक सिंडिकेट ने अधिकारियों, व्यवसायियों और राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ मिलकर भारी पैमाने पर अवैध वसूली की।
ईडी की पिछली चार्जशीट (मार्च 2025) में भी कवासी लखमा समेत 21 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें अनवर ढेबर, पूर्व IAS अनिल टूटेजा, यश टूटेजा, सौम्या चौरसिया सहित कई कंपनियाँ और डिस्टलरी फर्में शामिल थीं।
प्रमुख आरोपी:
- कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री)
- अनवर ढेबर (रायपुर महापौर का भाई)
- अनिल टूटेजा (पूर्व IAS अधिकारी)
- अरुणपति त्रिपाठी (CSMCL के पूर्व MD)
- विभिन्न निजी कंपनियाँ जैसे ओम साईं ब्रेवरेज, वेलकम डिस्टलर, भाटिया वाइन मर्चेंट आदि।
चार्जशीट का महत्व:
ईओडब्ल्यू द्वारा पेश यह चौथा पूरक चालान इस पूरे मामले की गंभीरता और गहराई को दर्शाता है। केस में आगे की सुनवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।



