
जांजगीर-चांपा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक बालेश्वर साहू को चांपा पुलिस ने गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 11 जून 2025 को उनके पड़ोसी चंद्रशेखर राठौर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी, और जबरन मकान खाली कराने जैसे संगीन आरोप लगाए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, विधायक साहू और उनके पड़ोसी चंद्रशेखर राठौर के बीच एसी आउटडोर यूनिट और चिमनी के धुएं को लेकर विवाद हुआ।
- 10 जून को राठौर ने विधायक के घरेलू कर्मचारी से एसी हटाने की बात कही थी।
- अगले दिन, विधायक खुद राठौर के पोर्च तक पहुंचे और परिवार को गाली-गलौज करते हुए, उनके जीजा हेमंत राठौर की पिटाई कर दी।
- राठौर के अनुसार, मोबाइल से वीडियो बनाने पर विधायक ने फोन छीनकर डाटा डिलीट कर दिया और थप्पड़ मारे।
- इसके बाद परिवार को घर छोड़ने की धमकी और गोली मरवाने की चेतावनी दी गई।
इन धाराओं में मामला दर्ज
चांपा थाने में विधायक के खिलाफ निम्न धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई:
- धारा 115 (2) – जान से मारने के प्रयास की तैयारी
- धारा 329 – दबाव डालकर संपत्ति से बेदखली
- धारा 315 – चोट पहुँचाने के इरादे से हमला
- धारा 296 – सार्वजनिक स्थान पर शांति भंग
पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद गवाहों के बयान और वीडियो फुटेज के आधार पर विधायक को गिरफ्तार किया। चूंकि मामला जमानतीय प्रकृति का था, उन्हें कुछ घंटों बाद मुचलका देकर रिहा कर दिया गया।
विधानसभा अध्यक्ष को दी गई सूचना
विधायक की गिरफ्तारी के मद्देनजर, विधानसभा अध्यक्ष को औपचारिक सूचना भेजी गई है, जो संविधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
विधायक ने भी की थी काउंटर शिकायत
उधर, विधायक बालेश्वर साहू ने भी अपने पड़ोसी राठौर के खिलाफ अपमान और उकसावे की शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों पक्षों की काउंटर एफआईआर दर्ज की गई हैं, और मामले की पुलिस जांच जारी है।
पहले भी रहे विवादों में
यह पहली बार नहीं है जब विधायक बालेश्वर साहू कानूनी पचड़ों में फंसे हों।
- सारगांव थाने में भी उनके खिलाफ भागवत आचार्य राजकुमार शर्मा द्वारा मारपीट की शिकायत दर्ज है।
- हालांकि उस मामले में तीन साल की देरी से चालान पेश हुआ और मामला अभी न्यायालय में लंबित है।
राजनीतिक हलचल और आगे की राह
इस गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है।
- विपक्ष ने इसे कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया है।
- वहीं कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।
निष्कर्ष
जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायक से नैतिक आचरण और शालीनता की अपेक्षा होती है। कानून अपना काम कर रहा है, अब देखना है कि जांच में किसे दोषी पाया जाता है और क्या विधायक को आगे भी किसी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।



