
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बिल्हा विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चांटीडीह में पदस्थ शिक्षिका उर्मिला बैगा को फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामले में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उर्मिला ने ओबीसी वर्ग की ‘ढीमर’ जाति की होने के बावजूद खुद को ‘बैगा’ अनुसूचित जनजाति (ST) दर्शाकर शिक्षिका की नौकरी हासिल की थी।
जांच में खुला फर्जीवाड़ा:
उर्मिला के खिलाफ जाति प्रमाण पत्र की शिकायत मिलने पर मामले की जांच उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति, आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कराई गई।
जांच में पाया गया कि:
- उर्मिला के दादा दुखिया, वर्ष 1928–29 के रिकॉर्ड में ‘ढीमर’ जाति के रूप में दर्ज थे।
- पिता रतनलाल की सेवा पुस्तिका में भी ढीमर जाति दर्ज है।
- उर्मिला के प्राथमिक विद्यालय प्रवेश अभिलेख में भी जाति ढीमर ही दर्ज है।
‘ढीमर’ जाति को राज्य और केंद्र सरकार की ओबीसी सूची में शामिल किया गया है, न कि अनुसूचित जनजाति में।
निरस्तीकरण और सेवा समाप्ति का आदेश:
जाति छानबीन समिति ने 11 दिसंबर 2006 को उर्मिला को जारी एसटी प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया और उसे सेवा से तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया।
इस आदेश के अनुपालन में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 7 फरवरी 2007 को उर्मिला की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।
हाई कोर्ट ने भी याचिका की खारिज:
सेवा समाप्ति के बाद उर्मिला ने आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन कोर्ट ने शिकायत और जांच को वैध ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के निर्णय के बाद, उर्मिला को सरकारी सेवा से पूर्ण रूप से बर्खास्त कर दिया गया।
न्यायिक दृष्टिकोण से मिसाल:
यह मामला फर्जी दस्तावेजों और आरक्षण के दुरुपयोग पर सख्त कार्यवाही का उदाहरण बन गया है। शिक्षा विभाग और छानबीन समिति की तत्परता तथा न्यायपालिका के स्पष्ट आदेशों ने यह सुनिश्चित किया है कि योग्यता और सामाजिक न्याय के साथ कोई समझौता नहीं होगा।



