
10 सितम्बर 2026 //
सुकमा न्यूज़ धमाका – 80 वर्ष की जगह 30 वर्ष और पुरुष की जगह महिला दर्ज, परिजनों का आरोप—गलत रिपोर्ट से बिगड़ी मरीज की हुई मौत। एक करोड़ मुआवजे और उच्चस्तरीय जांच की मांग।
जिला अस्पताल सुकमा में संचालित अटल आरोग्य लैब की कार्यप्रणाली और रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक मरीज की जांच रिपोर्ट में उसकी मूल पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां ही गलत दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है।
लैब की ओर से बरती गई गंभीर लापरवाही
परिजनों का आरोप है कि, लैब की गंभीर लापरवाही के कारण गलत रिपोर्ट तैयार हुई, जिसके आधार पर उपचार प्रक्रिया प्रभावित हुई और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। बाद में मरीज की मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने शासन से उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है।
स्व. रानीदान राठी के उपचार से जुड़ा है मामला
मामला सुकमा निवासी स्व. रानीदान राठी के उपचार से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार उनका उपचार जिला अस्पताल सुकमा में कराया जा रहा था। इसी दौरान जिला अस्पताल परिसर में संचालित अटल आरोग्य लैब द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट में मरीज के विवरण में गंभीर त्रुटियां सामने आईं।
उम्र 80, दर्ज कर दी गई 30
परिजनों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार लैब की रिपोर्ट में मरीज की वास्तविक उम्र 80 वर्ष के स्थान पर गलती से 30 वर्ष दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, मरीज का लिंग भी पुरुष की जगह महिला दर्ज हो गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यही गलत जानकारी लैब के (LIS) में भी प्रदर्शित हो रही थी।
लैब ने खुद मानी डेटा एंट्री की गंभीर गलती
मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि अटल आरोग्य लैब की ओर से जारी स्पष्टीकरण रिपोर्ट में स्वयं यह स्वीकार किया गया कि मरीज के पंजीयन के दौरान डेटा एंट्री में त्रुटि हुई थी। रिपोर्ट में उम्र और लिंग संबंधी गलत जानकारी दर्ज होने की बात स्वीकार की गई है।
सत्यापन की व्यवस्था नहीं
लैब की ओर से किए गए में भी मरीज पंजीकरण, बारकोड हैंडलिंग तथा पंजीयन एवं नमूना संग्रह के स्तर पर हुई त्रुटियों का उल्लेख किया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि, यदि मरीज की मूल पहचान से संबंधित इतनी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज करते समय ही सत्यापन की व्यवस्था होती तो गलत रिपोर्ट तैयार होने की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई?
यह त्रुटी नहीं, लापरवाही
मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को सुकमा निवासी लीलाधर राठी द्वारा भेजे गए शिकायत में कहा गया है कि, किसी भी चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट में मरीज की उम्र, लिंग और पहचान जैसी बुनियादी जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इन्हीं विवरणों के आधार पर चिकित्सक उपचार संबंधी निर्णय लेते हैं। ऐसे में रिपोर्ट में गंभीर गलती होना केवल सामान्य तकनीकी त्रुटि नहीं मानी जा सकती।
गलत रिपोर्ट के बाद बिगड़ती गई तबीयत
परिवार का आरोप है कि रिपोर्ट में हुई गंभीर गलती के बाद मरीज की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। परिजनों ने पूरे मामले को लेकर चिंता जताई और बाद में लैब प्रबंधन की ओर से भी गलती स्वीकार करते हुए सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई।
इतने सुधारों की गुंजाइश
19 जून 2026 की रिपोर्ट में लैब की ओर से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई उपाय किए जाने का उल्लेख किया गया है। इनमें मरीज के विवरण का मूल रिकॉर्ड से सत्यापन, रिपोर्ट में सुधार, संबंधित रिपोर्ट की समीक्षा, क्लिनिकल यूनिट को सूचना, जिम्मेदार कर्मचारी की काउंसलिंग तथा पुनरीक्षण करना, दोहरे स्रोतों से जांचना बारकोड सत्यापन और दोहरे स्तर की रिपोर्ट सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं लागू करने की बात कही गई है।
कर्मचारियों के लिए ज्ञान-वर्धन प्रशिक्षण’ तथा नियमित सुनना और गुणवत्ता आश्वासन समीक्षा का भी उल्लेख है। परिजनों का कहना है कि, यदि घटना के बाद इतनी सारी सुधारात्मक व्यवस्थाओं की आवश्यकता महसूस हुई, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि, पहले व्यवस्था में कितनी गंभीर कमियां थीं।
23 मई को हुई मरीज की मौत
परिवार के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के बाद मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और खराब होती चली गई और अंततः 23 मई 2026 को उनका निधन हो गया। परिजनों ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि अपूरणीय पारिवारिक और मानसिक क्षति है।
उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग
मामले को लेकर लीलाधर राठी ने शासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। आवेदन में मरीज की संपूर्ण मेडिकल फाइल, ओपीडी एवं आईपीडी रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन, लैब रिकॉर्ड, LIS डेटा, बारकोड रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखते हुए स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच कराने की मांग की गई है, ताकि किसी भी रिकॉर्ड में बदलाव या साक्ष्य नष्ट होने की संभावना न रहे।
एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
परिजनों ने शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह निर्धारित किया जाए कि गलत रिपोर्ट तैयार होने तथा उसके आधार पर हुई चिकित्सा प्रक्रिया का मरीज की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने एवं मृत्यु से कोई संबंध रहा या नहीं। आवेदन में एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए कहा गया है कि यह राशि केवल जीवन का मूल्य निर्धारित करने के लिए नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही के प्रति शासन की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मांगी जा रही है।
लैब के गुणवत्ता नियंत्रण पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने सुकमा जैसे आदिवासी और दूरस्थ जिले में संचालित सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच व्यवस्था, डेटा सत्यापन और लैब गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि शासन इस मामले में केवल लैब की आंतरिक सुधारात्मक कार्रवाई तक सीमित रहता है या मरीज की मौत से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी भी तय करता है।



