
25 जुलाई 2026 //
जगदलपुर न्यूज़ धमाका – केन्द्रीय जेल जगदलपुर में शुक्रवार को न्यायालय की अनुमति से एक विचाराधीन बंदी ने प्रेमिका के साथ सात फेरे लिए।
केन्द्रीय जेल जगदलपुर में शुक्रवार को न्यायालय की अनुमति से एक विचाराधीन बंदी ने प्रेमिका के साथ सात फेरे लिए। इस विवाह के साक्षी बने जेल प्रशासन, अधिवक्ता और समाजसेवी जो वर व वधु पक्ष की ओर से विवाह में शामिल हुए। दोनों पक्षों से सीमित सदस्यों को इस विवाह में शामिल होने की अनुमति थी।
जेल प्रशासन के मुताबिक, केंद्रीय जेल जगदलपुर में निरुद्ध विचाराधीन बंदी सुरेश सेठिया का विवाह न्यायालय की विशेष अनुमति एवं वर-वधू दोनों पक्षों के परिजनों की आपसी सहमति से केंद्रीय जेल परिसर में विधि-विधान एवं सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया। विवाह समारोह के आयोजन के लिए प्रशासन ने न्यायालय द्वारा प्रदत्त अनुमति का पूर्णतः पालन किया। विवाह के दौरान जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही विवाह की रस्मों को पूरी करने के लिए सारी व्यवस्था की गई थी जिससे विवाह कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।
जेल में 15 साल बाद गूंजी शहनाई
इस अवसर पर दोनों परिवारों के सीमित सदस्य न्यायालय की अनुमति एवं जेल नियमों के अनुरूप उपस्थित रहे। विवाह की समस्त प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए संपन्न की गई। इससे पहले लगभग डेढ़ दशक पूर्व ऐसा ही एक बार जेल में कोर्ट की अनुमति से विवाह कराया गया था यह दूसरी दफा है जब 15 वर्ष बाद जेल में शहनाई बजी।
सात माह से जेल में है आरोपी
आरोपी सुरेश सेठिया लगभग सात माह से दुष्कर्म के मामले से जेल में बंद है। जिस युवती से दुष्कर्म के मामले में उसे जेल भेजा गया था, अपनी उसी प्रेमिका के साथ धूमधाम से उसने जेल में फेरे लिए। दरअसल आरोपी सुरेश सेठिया के खिलाफ उसकी प्रेमिका के परिजनों ने शादी का झांसा देने और दुष्कर्म करने का मामला बोधघाट थाने में दर्ज कराया था। कोर्ट के आदेश पर आरोपी सुरेश सेठिया को न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल भेज दिया गया था।
शादी की प्रक्रिया जेल परिसर
इस दौरान उसकी प्रेमिका उससे मिलने केंद्रीय जेल आती रही। इस बीच एक बार फिर दोनों ने शादी करने की सहमति जताई जिसके बाद आरोपी द्वारा इसकी जानकारी केंद्रीय जेल प्रबंधन को दी गई और वकीलों के माध्यम से कोर्ट में शादी करने का हलफनामा दिया गया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों की बालिग उम्र को देखते हुए शादी की इजाजत दी। हालांकि मामला अब भी विचाराधीन है, ऐसे में शादी की प्रक्रिया जेल परिसर में ही की गई
आदेश पर कराया गया विवाह
केन्द्रीय जेल के अधीक्षक अक्षय तिवारी ने बताया कि, न्यायालय की अनुमति प्राप्त होने तथा दोनों परिवारों की सहमति के उपरांत मानवोचित एवं विधिसम्मत दृष्टिकोण अपनाते हुए विवाह की आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई। जिसके बाद वर वधू का विवाह पंडित द्वारा सम्पन्न कराया गया।

