
बिलासपुर न्यूज धमाका – हाईकोर्ट ने दुर्ग नगर निगम से जुड़े एक मामले में दायर याचिका को त्रुटिपूर्ण और अस्पष्ट पाते हुए खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायालय का बहुमूल्य समय नष्ट करती हैं। इसलिए अदालत ने याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि रायपुर स्थित शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय, माना कैंप को दी जाएगी।
क्या है मामला
कोरबा निवासी अशोक कुमार मित्तल ने याचिका दायर कर मांग की थी कि दुर्ग नगर निगम समझौते की आर्बिट्रेशन क्लाज (क्लॉज 1.18) को लागू करे और उन्हें ब्लैकलिस्ट न किया जाए, क्योंकि उनकी अपील प्राधिकरण के समक्ष लंबित है।
अधिवक्ता ने मानी गलती
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने स्वयं स्वीकार किया कि याचिका गलत तरीके से ड्राफ्ट की गई है और उचित नहीं है। उन्होंने याचिका वापस लेने और सही तरीके से नई याचिका दायर करने की अनुमति मांगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिविजन बेंच ने कहा कि यह याचिका बेहद लापरवाही और कैजुअल तरीके से दायर की गई है, जिससे अदालत का समय व्यर्थ हुआ। अदालत ने नई याचिका दायर करने की अनुमति तो दी, लेकिन पहले 10 हजार रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त रखी।



