
कबीरधाम न्यूज़ धमाका – छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति में कथित पैसों की मांग का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वायरल ऑडियो में नौकरी दिलाने के बदले 50 हजार रुपये की बात की जा रही है, जिसे महिला द्वारा बाइक गिरवी रखकर जुटाए जाने का जिक्र भी किया गया है।
इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कबीरधाम ने एसडीएम बोड़ला को जांच का जिम्मा सौंपा है और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है वायरल ऑडियो में?
वायरल ऑडियो क्लिप में एक महिला और पुरुष के बीच बातचीत हो रही है, जिसमें नौकरी (संभवत: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद) के बदले पैसों की बातचीत होती है:
- महिला कहती है कि “50 हजार तक का इंतजाम हो पाया है, उससे ज्यादा संभव नहीं। यह पैसा रिफाइनेंस के जरिए जुटाया गया है।”
- बातचीत में यह भी कहा जा रहा है कि “ज्वाइनिंग भी है आपका, दो बजे तक आइए, काम हो जाएगा।”
- पुरुष की तरफ से समय और धन लाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
यह ऑडियो व्यापक स्तर पर व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह मामला आंगनबाड़ी केन्द्र बंजरिहा ग्राम मुड़घुसरी प्लाट से जुड़ा हुआ है। पहले गीता मेरावी नाम की महिला को नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में उनका आदेश निरस्त कर दसरी साहू की नियुक्ति की गई। इसी से जुड़ा हुआ कथित ऑडियो, जिसमें तरेगांव जंगल परियोजना के ऑपरेटर रामाधार साकत की आवाज शामिल बताई जा रही है, वायरल हुआ है।
इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बोड़ला को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
शून्य सहिष्णुता नीति पर सवाल
राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति के बावजूद, इस प्रकार के प्रकरण सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नैतिक पतन का मामला होगा, बल्कि सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर भी गहरी चोट होगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को भ्रष्टाचार और महिलाओं के शोषण से जोड़ते हुए कह रहे हैं कि “आंगनबाड़ी जैसे जनसेवा के क्षेत्र में यदि सौदेबाज़ी हो रही है, तो यह शासन-प्रशासन की साख पर सीधा हमला है।”
जांच जारी, कार्रवाई तय
जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच में यदि लेन-देन या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष:
वायरल ऑडियो ने सरकारी भर्तियों की निष्पक्षता को कठघरे में ला खड़ा किया है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
