
बलरामपुर न्यूज धमाका – जिले में मानव बलि का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अपने बीमार बेटे को ठीक करने की आस में एक युवक ने तंत्र-मंत्र के झांसे में आकर दूसरे के मासूम बेटे की बलि चढ़ा दी थी। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए करीब डेढ़ साल बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
थाना सामरीपाठ के ग्राम झलबासा में रहने वाले बिरेन्द्र नगेसिया ने 6 जून 2024 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका 3 साल का बेटा अजय नगेसिया जंगल से अचानक लापता हो गया। वे उस दिन परिवार सहित महुआ फूल बीनने जंगल गए थे और झोपड़ी बनाकर डेरा डाले हुए थे।
अजय की मां ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 को जब वह स्कूल से लौटे तो बच्चा गायब था। इसके बाद थाना सामरीपाठ में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई।
तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से हुआ हत्याकांड
जांच के दौरान पुलिस को सुराग मिले कि गांव के ही राजू कोरवा ने कुछ ग्रामीणों के साथ मिलकर झाड़-फूंक और बड़ा पूजा करने की बात कही थी। पहले पूछताछ में आरोपी ने नशे में होने का बहाना बनाया, लेकिन जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने मानव बलि की बात स्वीकार कर ली।
राजू कोरवा ने पुलिस को बताया कि उसका बड़ा बेटा मिर्गी और मानसिक बीमारी से ग्रस्त था। उसे विश्वास था कि “महादानी देवता” को बलि देने से उसका बेटा ठीक हो जाएगा। इसी अंधविश्वास के चलते उसने मासूम अजय को बिस्किट का लालच देकर घर बुलाया और उसी दिन बलि चढ़ा दी।
हत्या के बाद सबूत भी किए गायब
बलि देने के बाद आरोपी ने:
- शरीर का धड़ बोरे में भरकर बोड़ादह कोना नाला में जला दिया
- सिर को तीन दिन तक घर में छिपाकर रखा
- बाद में कपड़े में लपेटकर उसे गड्ढे में दफना दिया और ऊपर पत्थर रख दिए
पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में उत्खनन कर खोपड़ी और हड्डियों के अवशेष बरामद किए हैं। आरोपी के घर से हत्या में प्रयुक्त लोहे की छुरी भी मिली।
इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध
आरोपी राजू कोरवा (उम्र 24 वर्ष) के खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), और 363 (अपहरण) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है।
जांच टीम में शामिल अधिकारी
- थाना प्रभारी – निरीक्षक विजय प्रताप सिंह
- सहायक उप निरीक्षक – आनंद मसीह तिर्की
- प्रधान आरक्षक – संजय साहू
- आरक्षक – आदित्य कुजुर, संतोष यादव, अमित लकड़ा, ओमकार रजक
समाज में फैले अंधविश्वास पर फिर एक गंभीर सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और कुप्रथाओं की भयावह हकीकत को उजागर करती है। अब जरूरत है ऐसी मानसिकता के विरुद्ध जनजागरूकता फैलाने और कठोर कार्रवाई की।



