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रेत माफिया ने खड़े किए ‘रेत के पहाड़’: बरसात में ऊंची कीमत पर बेचने की तैयारी, स्वीकृति पर प्रशासन मौन

राजिम न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के नवापारा-राजिम क्षेत्र में रेत माफिया ने खुलेआम कानून को धता बताते हुए लाखों टन रेत का अवैध भंडारण कर लिया है। बारिश के दौरान खनन पर प्रतिबंध के चलते कारोबारी अब रेत के ‘पर्वत’ खड़े कर मुनाफाखोरी की तैयारी में जुटे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इस विशाल भंडारण के लिए प्रशासन से किसी प्रकार की अनुमति ली गई है या नहीं।


रेत की आड़ में बड़ा खेल?

  • मौरीकला पेट्रोल पंप, मंदलोर और उससे लगे खुले मैदानों में रेत के विशाल टीले देखे जा सकते हैं।
  • जानकारों के अनुसार, एक हाइवा में औसतन 22 टन रेत आता है, ओवरलोड करने पर यह 30 टन तक भी पहुंच सकता है।
  • इस लिहाज से यह भंडारण करोड़ों रुपये की कीमत का प्रतीत होता है।

बारिश में खनन पर प्रतिबंध, फिर भी तैयारी जोरों पर

बरसात के मौसम में नदी से रेत खनन प्रतिबंधित है। बावजूद इसके नवापारा शहर और धमतरी जिले की सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में भारी मात्रा में रेत जमा कर ली गई है। इसका एकमात्र उद्देश्य बारिश के दौरान बढ़ी मांग का फायदा उठाना है — जब अन्य वैध स्रोत बंद होते हैं।


प्रशासनिक स्वीकृति पर सवाल

इस पूरे भंडारण को लेकर अब कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं:

  • क्या संबंधित रेत कारोबारियों को प्रशासन से वैध भंडारण की अनुमति मिली है?
  • यदि हां, तो कितनी मात्रा और किन स्थानों के लिए स्वीकृति दी गई?
  • क्या ये स्थान पर्यावरण एवं खनिज नियमों के अंतर्गत भंडारण के लिए चिन्हित थे?

इन सवालों पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


बाजार में बढ़ी मांग, बाहर भेजने की तैयारी

सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ से लगे ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में बारिश के दौरान रेत की भारी मांग होती है। यही वजह है कि अब नवापारा के कारोबारी रेत बाहर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।


भविष्य में जांच की उम्मीद

इस मामले में प्रशासन यदि जल्द मौके का निरीक्षण, रेत का आंकलन और स्वीकृति दस्तावेजों की जांच नहीं करता है, तो यह रेत माफिया की बड़े पैमाने पर लूट और राजस्व क्षति में बदल सकता है। साथ ही, पर्यावरणीय और भौगोलिक संतुलन पर भी असर पड़ेगा।


निष्कर्ष

जहां एक ओर निर्माण कार्यों के लिए रेत आवश्यक संसाधन है, वहीं दूसरी ओर इसके अवैध भंडारण और कालाबाजारी से सरकारी राजस्व को तो नुकसान होता ही है, आम जनता भी बढ़े हुए दामों की मार झेलती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब और कैसे हस्तक्षेप करता है, और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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