
गरियाबंद न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक खबर सामने आई है। फिंगेश्वर बीईओ कार्यालय में पदस्थ दो लिपिकों ने दिवंगत शिक्षकों की पत्नियों से पेंशन और उपादान राशि दिलाने के नाम पर करीब 5 लाख रुपये की रिश्वत वसूली, लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी कार्य नहीं किया।
FIR दर्ज, लिपिक निलंबित
घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों लिपिकों – मजहर खान (फिंगेश्वर बीईओ कार्यालय) और खोरबहार ध्रुव (बोरिद हाईस्कूल) को निलंबित कर दिया है। साथ ही गरियाबंद पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और अमानवीय आचरण के तहत FIR दर्ज की है।
क्या है पूरा मामला?
- दिवंगत शिक्षक गेसराम दीवान और चैन सिंह दीवान की मृत्यु के बाद उनकी पत्नियां विशाखा बाई और देसो बाई पेंशन और उपादान राशि के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहीं थीं।
- दिसंबर 2024 में दोनों विधवाओं से 4 लाख 80 हजार रुपये रिश्वत लेकर यह कहा गया कि जल्द ही उनका प्रकरण तैयार कर राशि दिला दी जाएगी।
- लेकिन 6 महीने बीत जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई।
- बार-बार संपर्क करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला।
जब न्याय के दरवाजे खटखटाए
थक-हारकर पीड़ित विधवाओं ने गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा से शिकायत की। एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए और दोनों के खिलाफ फिंगेश्वर व छुरा थानों में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
कड़ी कार्रवाई की मांग
शिक्षक संगठनों और स्थानीय समाजसेवियों ने इस शर्मनाक कृत्य पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि:
“जहां विधवाओं को सहयोग मिलना चाहिए, वहां उनसे रिश्वत लेना अमानवीय और अपराध से कम नहीं।”
कानून के शिकंजे में भ्रष्टाचारी कर्मचारी
FIR दर्ज होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों लिपिकों को निलंबित कर दिया है। साथ ही इनके शासनादेशों और अन्य फाइलों की जांच भी शुरू कर दी गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आगे इन पर घूसखोरी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लग सकती हैं।
निष्कर्ष
शिक्षा विभाग, जो देश का भविष्य गढ़ने वाले गुरुओं का संरक्षक है, वहां ऐसा अमानवीय भ्रष्टाचार सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आरोपी कर्मियों को कड़ी सजा मिलेगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जाएगा।



