
दुर्ग न्यूज धमाका – नेवई थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला साइबर क्राइम सामने आया है जहाँ शातिर ठगों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर एक महिला को “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंसा लिया और उससे 54 लाख 90 हजार रुपये की ठगी कर ली।
पीड़िता नम्रता चंद्राकर ने नेवई थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर साइबर एक्सपर्ट की एक टीम मामले की गहराई से जांच में जुट गई है।
कैसे दिया गया घटना को अंजाम:
सूत्रों के अनुसार, ठगों ने महिला को फोन कर खुद को CBI अधिकारी बताया और कहा कि उनका नाम एक आपराधिक जांच में सामने आया है। महिला को धमकाते हुए उन्होंने कहा कि यदि वह सहयोग नहीं करती, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इसके बाद शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल। वीडियो कॉल के माध्यम से नकली अधिकारी, फर्जी दस्तावेज और यूनिफॉर्म में लोग दिखाए गए। महिला को डराया गया कि उसे घर में नजरबंद रखा जाएगा और उसकी गतिविधियाँ निगरानी में रहेंगी। इस दौरान महिला से बार-बार पैसे ट्रांसफर कराए गए, और कुल मिलाकर ठगों ने करीब ₹54,90,000 ऐंठ लिए।
पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई:
नेवई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है। दुर्ग साइबर सेल की विशेषज्ञ टीम इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड की जांच कर रही है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति इस तरह के कॉल्स या वीडियो कॉल्स से सावधान रहें और तुरंत 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत करें।
क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
‘डिजिटल अरेस्ट’ एक नया साइबर फ्रॉड का तरीका है जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों के नाम पर डर फैलाकर व्यक्ति को घर में ही ‘नजरबंद’ रहने को कहते हैं, और धीरे-धीरे उससे बड़ी धनराशि ऐंठ लेते हैं।
सावधान रहें – सुरक्षित रहें!
- CBI, पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती।
- किसी अनजान व्यक्ति को बैंक डिटेल्स या OTP साझा न करें।
- ऐसे किसी भी कॉल या वीडियो कॉल से डरें नहीं, सतर्क रहें।
साइबर क्राइम की शिकायत के लिए कॉल करें: ☎️ 1930 या अपने नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करें।



