
दुर्ग न्यूज धमाका – एसटीएफ ने एक और अवैध घुसपैठ का पर्दाफाश किया है। भिलाई की सुपेला कांट्रेक्टर कॉलोनी में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहे एक बांग्लादेशी दंपति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी महिला भारत में अपना नाम ‘ज्योति’ बताकर रह रही थी, जबकि उसका असली नाम शाहिदा खातून (35 वर्ष) है।
कैसे हुआ खुलासा?
एसटीएफ प्रभारी सत्य प्रकाश तिवारी को सूचना मिली थी कि एक महिला और पुरुष फर्जी पहचान के सहारे भारत में रह रहे हैं। जांच में सामने आया कि:
- दोनों बांग्लादेश के निवासी हैं
- 2017 में पासपोर्ट व वीजा पर भारत आए थे
- महिला का वीजा 13 सितंबर 2018 और पुरुष का वीजा 12 अप्रैल 2020 को समाप्त हो गया था
- फिर भी ये अवैध रूप से भारत में रह रहे थे
फर्जी दस्तावेजों का दुरुपयोग
जांच में पता चला कि शाहिदा खातून ने अपना नाम ‘ज्योति’ बताकर निम्न फर्जी दस्तावेज बनवा लिए थे:
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- मतदाता पहचान पत्र
- भारतीय पासपोर्ट
- बैंक पासबुक
वह इंटरनेट कॉल और व्हाट्सएप के जरिए बांग्लादेश में अपने परिवार से संपर्क में थी।
दंपति की कहानी: बॉर्डर पार कर, नाम बदलकर पहचान छिपाई
- शाहिदा पहली बार 2009 में अवैध रूप से बोंगा बॉर्डर, पश्चिम बंगाल से भारत में घुसी थी
- मुंबई में मजदूरी के दौरान उसकी मुलाकात रासेल शेख से हुई
- दोनों ने शादी की और नाम बदलकर ‘ज्योति’ बन गई
- 2017 में वीजा-पासपोर्ट से भारत वापस आए, लेकिन लौटे नहीं
क्राइम हिस्ट्री और जांच
- आरोपी रासेल शेख का दिल्ली में लूट के एक मामले में नाम आ चुका है
- पुलिस अब उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि की पुनः जांच कर रही है
- आरोपी महिला पहले से ही नकली पहचान बनाकर पश्चिम बंगाल, मुंबई और अब छत्तीसगढ़ में रह चुकी है
कानूनी कार्यवाही
दोनों पर निम्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है:
- भारतीय न्याय संहिता 2023
- विदेशी नागरिक अधिनियम 1946
- भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1967
- पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920
मकान मालिक पर भी कार्रवाई
- महिला पिछले दो वर्षों से किराए के मकान में रह रही थी
- पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराने के कारण मकान मालिक पर भी केस दर्ज किया गया है
संदेश व अपील
“यदि कोई किराएदार अपने दस्तावेज़ नहीं दिखाता या विदेशी मूल का लगता है, तो मकान मालिक तुरंत पुलिस को सूचित करें। फर्जी दस्तावेजों पर रहना देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।”


