धर्म

आज करे मां चंद्रघंटा की पूजा

इस मंत्र का करे जाप

 पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं
तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

‘अग्नि’ तत्व की तेजोमयी मूर्ति ‘मां चंद्रघंटा’ अमृतमयी, स्वब्रह्मामयी रूपिणी है. चंद्र में प्रकाश सूर्य द्वारा प्रकाशित है. चंद्र अर्थात सोमरस प्रदान करने वाली, श्रेष्ठमयी, घण्टा अर्थात ‘अग्नि’शब्द ध्वनि का परिचायक है, भगवती का अग्निमय, क्रियात्मक स्वरूप है. घण्टे से ‘ब्रह्मनाद’व अनहत नाद स्वरूपिणी हैं. घण्टे की ध्वनि से प्रेत-बाधादि से रक्षा होती है.इनकी आराधना से होने वाला एक बहुत बड़ा सद्गुण यह भी है कि वीरता-निर्भयता के साथ सौम्यता एवं विनम्रता का भी विकास होता है. माता के इस रूप की साधना करने से समस्त सांसारिक कष्टों से विमुक्त होकर सहज ही परमपद प्राप्त होता है. नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन परम शक्तिदायक और कल्याणकारी स्वरूप की आराधना की जाती है.

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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