छतीसगढ़मरवाही

आत्मानंद स्कूल में हिंदी माध्यम बहाली व प्रिंसिपल हटाने की मांग पर ग्रामीणों का चक्काजाम

गौरेला‑पेंड्रा‑मरवाही न्यूज धमाका – ग्राम पंचायत सेमरा स्थित आत्मानंद स्कूल में फिर से हिंदी माध्यम शुरू कराने और वर्तमान प्रिंसिपल को हटाने की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने एसडीएम ऋचा चंद्रकार को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र किया जाएगा।


मूल विवाद क्या है?

  • जनवरी 2020 तक विद्यालय में हिंदी व अंग्रेज़ी दोनों माध्यम संचालित थे।
  • ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान प्रिंसिपल ने कोई सरकारी आदेश न होने के बावजूद हिंदी माध्यम अचानक बंद करा दिया।
  • इससे हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले कई दर्जन बच्चे पढ़ाई से वंचित हो गए और पास के दूसरे स्कूलों में सीटें भर जाने के कारण दाखिले में भी दिक्कतें आ रही हैं।

प्रदर्शनकारियों के प्रमुख आरोप

  1. हिंदी माध्यम बंद – बच्चों को पढ़ने का मूल अधिकार छीना गया।
  2. प्रिंसिपल की मनमानी – शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं, व्यवहार “असंतोषजनक”।
  3. छात्र‑छात्राओं में हीनभावना – हिंदी माध्यम के अभाव में ग्रामीण बच्चे आत्मविश्वास खो रहे हैं।

प्रशासनिक दख़ल

  • एसडीएम ऋचा चंद्रकार ने ज्ञापन लेते हुए आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा अधिकारी व आत्मानंद स्कूल प्रबंधन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगकर एक सप्ताह में निर्णय लिया जाएगा।
  • विद्यालय प्रबंधन समिति की आपात बैठक बुलाने और ग्रामीण प्रतिनिधियों को शामिल करने का संकेत भी दिया गया।

आंदोलन का अगला चरण

ग्रामीणों ने दो‑टूक कहा कि यदि

  • हिंदी माध्यम की पुनर्बहाली और
  • प्रिंसिपल का स्थानांतरण/दूरासैन

पर ठोस आदेश नहीं आया, तो ज़िला मुख्यालय तक पैदल मार्च और स्कूल गेट तालाबंदी जैसे कदम उठाए जाएंगे।


महत्त्व क्यों?

  • आत्मानंद योजना के तहत संचालित ये स्कूल गुणवत्ता‑युक्त नि:शुल्क शिक्षा का ब्रांड माने जाते हैं।
  • ऐसे में हिंदी भाषी ग्रामीण समुदाय की उपेक्षा से सामाजिक‑शैक्षिक असमानता बढ़ने का खतरा है।
  • यह मामला नीति‑नियंताओं के लिए संकेत है कि माध्यम की विविधता को संरक्षित रखते हुए गुणवत्ता सुधारना आवश्यक है।

“बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगने देंगे। जब तक हिंदी माध्यम वापस नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।”
— सेमरा ग्रामसभा प्रतिनिधि

प्रशासनिक रिपोर्ट का इंतजार है; उधर अभिभावकों का धैर्य जवाब दे रहा है। अगर समाधान नहीं निकला तो यह मुद्दा राज्य‑स्तरीय शिक्षा नीति पर बहस छेड़ सकता है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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