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तहसीलदारों का अनोखा धरना: वर्किंग डेज़ में हड़ताल, छुट्टी के दिन आराम!

रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। धरना स्थल पर कार्यदिवसों के दौरान आंदोलन जारी है, मगर शनिवार-रविवार को हड़ताल की भी छुट्टी कर दी जा रही है। इस स्थिति ने जहां एक ओर आम नागरिकों की परेशानियों को बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन की गंभीरता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।


क्या हैं तहसीलदारों की मुख्य मांगें?

  • हर तहसील में पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति – पटवारी, कंप्यूटर ऑपरेटर, चपरासी, राजस्व निरीक्षक आदि।
  • डिप्टी कलेक्टर के प्रमोशन में 50:50 का अनुपात (सीधी भर्ती बनाम पदोन्नति) बरकरार रखा जाए।
  • संसाधनों की उपलब्धता के बिना “काम नहीं” के सिद्धांत पर अमल।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने साफ कहा कि पर्याप्त संसाधन और सुविधा न मिलने के कारण तहसीलदारों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।


धरना वीकेंड पर क्यों नहीं? संघ ने दी सफाई

तहसीलदार संघ ने शनिवार-रविवार को धरना न देने के पीछे चार प्रमुख कारण बताए:

  1. शासकीय कार्य दिवस न होने से धरने का कोई प्रशासनिक प्रभाव नहीं पड़ता।
  2. हड़ताल का उद्देश्य केवल विरोध नहीं, प्रभावी कार्य बाधा के ज़रिए शासन को संदेश देना है।
  3. जनहित को ध्यान में रखते हुए आम जनता को वीकेंड में अनावश्यक असुविधा से बचाया जा रहा है।
  4. संघ की नैतिक जिम्मेदारी और अनुशासित छवि बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है।

जनता का दर्द: “धरना मनमाफिक, काम अधर में”

धरना स्थल शनिवार को खाली देख कर कई नागरिकों ने सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों के ज़रिए कड़ा सवाल उठाया:

“अगर तहसीलदार जनता के लिए काम नहीं कर सकते, तो कम से कम वीकेंड पर पेंडिंग जाति, निवास, आय प्रमाणपत्र जैसे जरूरी काम ही निपटा देते।”

एक नागरिक, नाम न छापने की शर्त पर


क्या आंदोलन सही दिशा में है?

पक्ष:

  • आंदोलन व्यवस्था की गहराई से उठाई गई समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहा है।
  • रणनीतिक हड़ताल से प्रशासनिक दबाव बनाए बिना जनता को पूरी तरह से असहज नहीं किया जा रहा।

विपक्ष:

  • “अनिश्चितकालीन” हड़ताल का वीकेंड ब्रेक, इसके गंभीर होने पर सवाल खड़े करता है।
  • जनता को कोई विकल्प न देकर अधूरे कामों को अटका देना, असंवेदनशीलता दर्शा सकता है।

निष्कर्ष

तहसीलदारों की मांगें प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाती हैं — संसाधनों की कमी, कार्यभार का असंतुलन और पदोन्नति में भेदभाव। लेकिन, जनता की नज़र में आंदोलन की संवेदनशीलता और नैतिक पक्ष तभी मजबूत होगा जब उसे अपने कार्यों के लिए राहत भी मिले।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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