
कोंडागांव न्यूज धमाका – रावघाट से जगदलपुर तक प्रस्तावित रेलवे लाइन प्रोजेक्ट को लेकर दशकों से इंतजार कर रहे बस्तरवासियों के लिए एक और अपडेट सामने आया है। कोण्डागांव जिले में अब रेलवे द्वारा वन भूमि का जीपीएस सर्वे शुरू कर दिया गया है, जबकि राजस्व भूमि के लिए पहले ही अधिकांश किसानों को मुआवजा वितरित किया जा चुका है।
153 हेक्टेयर वनभूमि का हो रहा सर्वे
रेल लाइन विस्तार में आ रही 153 हेक्टेयर वनभूमि को लेकर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) की टीम सर्वेक्षण में जुटी है। सर्वे कोण्डागांव वनमंडल के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्रों में जीपीएस तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है।
डीएफओ चूडामणी सिंह ने बताया कि पूर्व सर्वे के आधार पर ही अब विस्तृत स्थल निरीक्षण किया जा रहा है और परिवेश पोर्टल-2 पर डाटा अपलोड कर नियामानुसार वन स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राजस्व भूमि पर मुआवजा वितरण पूरा
इस रेल परियोजना में 63 हेक्टेयर राजस्व भूमि भी अधिग्रहण की गई है।
अपर कलेक्टर चित्रकांत चार्ली ठाकुर के अनुसार, इस ज़मीन के बदले 319 किसानों में से 311 को मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि शेष किसानों की प्रक्रिया चल रही है।
धीमी रफ्तार बनी बड़ी चुनौती
हालांकि यह रेल प्रोजेक्ट कई सालों से चल रहा है, लेकिन काम की गति बेहद धीमी रही है। अभी तक रेल लाइन केवल कांकेर जिले के केंवटी तक ही पहुंच पाई है, जबकि करीब 250 किलोमीटर का कार्य अब भी बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी रफ्तार से काम हुआ तो आने वाले 10 वर्षों तक भी रायपुर से बस्तर के लिए सीधी रेल सेवा शुरू होना मुश्किल है।
नई उम्मीदें: अब SECR के हाथों में प्रोजेक्ट
इस बार थोड़ी उम्मीद इसलिए जगी है क्योंकि अब परियोजना की जिम्मेदारी SECR (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) ने संभाल ली है। इससे पहले यह कार्य ईरकॉन और बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड के हाथों में था, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।
निष्कर्ष:
रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना बस्तर अंचल की आर्थिक और सामाजिक कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन अगर भौगोलिक, प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों को शीघ्र नहीं सुलझाया गया तो यह परियोजना वर्षों तक अधर में लटकी रह सकती है।
