
महासमुंद न्यूज धमाका – प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का उद्देश्य हर नागरिक को छत उपलब्ध कराना है, लेकिन महासमुंद जिले में यह योजना शासकीय लापरवाही और गड़बड़झाले का शिकार हो गई है। अधिकारियों-कर्मचारियों की गलती से एक अपात्र व्यक्ति को आवास दे दिया गया, जबकि वास्तविक पात्र हितग्राही अब तक अपने हक के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।

क्या है मामला?
ग्राम बंजारी के शत्रुहन साहू, पिता अभेयराम साहू को वर्ष 2017-18 में PMAY के तहत आवास स्वीकृत हुआ था, लेकिन इस आवास का लाभ उसी गांव के एक अन्य व्यक्ति शत्रुहन केंवट, पिता बिसहत को दे दिया गया। शत्रुहन साहू को इस बात की जानकारी तब मिली जब 2024-25 में उन्होंने पत्नी राजकुमारी साहू के नाम से दोबारा आवेदन किया, लेकिन आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया गया कि उनके नाम पहले ही योजना का लाभ दिया जा चुका है।

जांच में पुष्टि, फिर भी कार्रवाई नहीं
शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने एक चार सदस्यीय जांच टीम गठित की, जिसने 19 मार्च 2025 को जिला पंचायत CEO को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि आवास का लाभ गलत व्यक्ति को दिया गया, और अपात्र से राशि की वसूली की जानी चाहिए।
लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पात्र हितग्राही अब पीएमओ और PGC तक शिकायत भेज चुका है, फिर भी जवाब सिर्फ आश्वासन है।
अधिकारी का रटा-रटाया जवाब
जब मीडिया ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सच्चितानंद आलोक से सवाल किया, तो उन्होंने “जांच जारी है” और “निर्देशानुसार कार्रवाई होगी” जैसे रूटीन जवाब दिए। साथ ही, हितग्राही पर पक्का मकान होने का संदेह जताते हुए उसे भी जांच के दायरे में लाने की बात कही गई।
क्या कहता है ये मामला?
- सरकारी योजनाओं में नियमों की अनदेखी और लापरवाही से पात्र वंचित हो रहे हैं।
- नाम में समानता जैसी गलती से लोगों को बरसों तक न्याय नहीं मिल रहा।
- जांच रिपोर्ट के बावजूद अधिकारियों की निष्क्रियता योजनाओं की पारदर्शिता और भरोसे पर सवाल खड़े करती है।
