
27 अगस्त 2026 //
रायपुर न्यूज़ धमाका – राजधानी रायपुर के समीपस्थ ग्राम कुटेशर में 26 अगस्त को राज्य स्तरीय पंथी नृत्य महोत्सव सुरता का भव्य आयोजन किया गया।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीपस्थ ग्राम कुटेशर में 26 अगस्त को राज्य स्तरीय पंथी नृत्य महोत्सव सुरता का भव्य आयोजन किया गया। यह समारोह पंथी नृत्य के पुरोधा स्वर्गीय देवदास बंजारे और स्वर्गीय सालिक राम गिलहरे की पावन स्मृति में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दोपहर 2 बजे अतिथियों द्वारा गुरु घासीदास बाबा जी की गद्दी स्थापना, पूजा-अर्चना और आरती के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश भर से जुटे साहित्यकारों, लोक कलाकारों और प्रबुद्धजनों ने स्वर्गीय देवदास बंजारे के व्यक्तित्व, उनकी अद्वितीय कला यात्रा और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने में उनके ऐतिहासिक योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया।
राज्य भर की पंथी टीमों ने अपनी मनमोहक दीं प्रस्तुतियां
महोत्सव में राज्य भर की पंथी टीमों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा प्रांगण गुरु घासीदास जी के संदेशों और पंथी की पावन धुनों से गुंजायमान रहा। इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में संतोष जोशी (छतौना) ने मंगल भजन की मनमोहक प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय कर दिया। प्रसिद्ध सतनाम एवं लोक गायक गोरेलाल बर्मन, चंदन बांधे, तारा कुलकर्णी और शिवा जांगड़े ने अपनी सुरीली गायकी से ऐसा समां बांधा कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।
प्रमुख पंथी नृत्य दलों का प्रदर्शन
महोत्सव में प्रदेश के कई ख्यातिप्राप्त पंथी दलों ने अपनी ऊर्जावान और लयबद्ध प्रस्तुतियां दीं।
- उपकार पंथी लोकनृत्य दल – सलीम जांगड़े एवं साथी (कुटेश्वर)
- मधुर सुहावना पंथी लोकनृत्य दल -गौकरणदास बघेल एवं साथी (पेड्रीतराई, दुर्ग)
- अहिवारा पंथी ग्रुप – सहदेव बंजारे एवं साथी (दुर्ग)
- झंकार पंथी लोकनृत्य दल – धनीराम घृतलहरे एवं साथी (कुटेश्वर)
- जागृति कुर्रे छत्तीसगढ़ की एक प्रसिद्ध भरथरी गायिका और लोक कलाकार

कलाकारों का सम्मान
समारोह के दौरान उपस्थित वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और अतिथियों द्वारा लोक कला के संरक्षण और देवदास बंजारे जी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले इन कलाकारों को स्मृति शील्ड देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों, प्रबुद्धजनों और अतिथियों ने स्वर्गीय देवदास बंजारे की कला यात्रा और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने में उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन किया।
ये लोग रहे मौजूद
इस मौके पर डॉ. परदेसी राम वर्मा, शोभाराम यादव, दाऊ कुलेश्वर बैस, उमेश मिश्रा, राजेंद्र टंडन, विरेंद्र टंडन, प्रधुमन घृतलहरे, रामप्रसाद मिर्चे, पुरुषोत्तम चंद्राकर, लक्ष्मीकांत जडेजा दास, मनोहर घृतलहरे, महेश वर्मा, राजेन्द्र साहू , दीनदयाल कोसले, लैनू (रंजीत) गायकवाड, लेखराम घृतलहरे, संतोष जोशी, सनत गिलहरे, डॉ. संजय कन्नौजे, डॉ. जे. आर. सोनी, अशोक तिवारी, राकेश तिवारी, डॉ. राजेन्द्र रंगीला, मिलन रंगीला, अमोलदास टंडन, गौकरणदास बघेल डॉ.सी.एल. रात्रे, मोतीलाल घृतलहरे, किशुन पाटले, रोहित कोसरिया, भूपेन्द्र सोनवानी, खेमचंद कुरें, राजेश बंजारे सहित गॉव के अन्य लोग भी मौजूद रहे।



