
रायपुर न्यूज धमाका – मुख्य सचिव अमिताभ जैन के सेवानिवृत्ति से ठीक पहले, पूरे राज्य में इस बात की जोरदार चर्चा थी कि अगला मुख्य सचिव कौन होगा। 29 जून की शाम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्यपाल के बीच अचानक हुई मुलाकात ने इस चर्चा को और गरमा दिया। सूत्रों की मानें तो 1994 बैच के IAS अधिकारी मनोज पिंगुआ को मुख्य सचिव बनाए जाने की पूरी तैयारी थी — लेकिन 30 जून की दोपहर आए केंद्र की स्वीकृति के बाद यह समीकरण पूरी तरह बदल गया।
क्या हुआ था 29 जून की शाम?
- मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिले, दोनों की फोटो सार्वजनिक की गई।
- सरकार की ओर से कहा गया कि “राज्यहित के विषयों पर चर्चा हुई”।
- अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मनोज पिंगुआ के नाम पर सहमति बनने लगी थी।
- वह हाल ही में दिल्ली में पीएमओ अधिकारियों से भी मिले थे, जिससे उनकी नियुक्ति की अटकलें तेज हुई थीं।
पिंगुआ क्यों थे प्रमुख दावेदार?
- 1994 बैच के वरिष्ठ IAS
- वर्तमान में राज्य में वरिष्ठ प्रशासनिक भूमिका में कार्यरत
- केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर अनुभवी
- राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में स्वीकार्य चेहरा
लेकिन अब क्या हुआ?
कैबिनेट बैठक में अप्रत्याशित मोड़ आया —
अमिताभ जैन को सेवा विस्तार दे दिया गया, केंद्र सरकार की अनुमति के बाद।
इसका अर्थ है कि फिलहाल मनोज पिंगुआ की नियुक्ति स्थगित हो गई है, और वे अगले कुछ महीनों तक प्रतीक्षा सूची में रहेंगे।
विश्लेषण:
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| राजनीतिक संतुलन | भाजपा सरकार अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व को बनाए रखना चाहती है। |
| संकेत राज्यपाल को? | 29 जून की मुलाकात शायद एक संभावित नियुक्ति की सूचना देने के लिए थी, जो अब टल गई। |
| मनोज पिंगुआ का भविष्य? | यदि आगामी तीन महीने में कोई विशेष परिस्थिति उत्पन्न न हुई, तो अगले मुख्य सचिव वही हो सकते हैं। |
निष्कर्ष:
मुख्य सचिव की कुर्सी के लिए दौड़ अभी खत्म नहीं हुई — केवल कुछ समय के लिए स्थगित हुई है। अमिताभ जैन का अनुभव एक तरफ है, तो दूसरी ओर युवा नेतृत्व को अवसर देने की मांग भी लगातार उठ रही है।
मनोज पिंगुआ, फिलहाल भले ही रुक गए हों, लेकिन उनकी संभावनाएं खत्म नहीं हुईं। आने वाले समय में वह राज्य प्रशासन की सबसे ऊंची कुर्सी पर विराजमान हो सकते हैं।



