
24 अगस्त 2026 //
जगदलपुर न्यूज़ धमाका – जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर बकावंड ब्लाक के करपावंड क्षेत्र के पाथरी यानी पार्वतीपुरम पुरातात्विक महत्व का गांव है।
जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर बकावंड ब्लाक के करपावंड क्षेत्र के पाथरी यानी पार्वतीपुरम पुरातात्विक महत्व का गांव है। खासियत यह है कि यहां के जंगलों में सैकडों शिव लिंग मिले हैं। अब इन्हें मंदिरों में स्थापित कर पूजा जा रहा है। बाहर से आए लोग बहुत से शिवलिंग चोरी कर ले गए थे। यहां तक कि पाथरी से ओडिशा भी लोग शिवलिंग ले गए हैं।
पूर्व सरपंच मंगलूराम कश्यप कहते हैं कि, यहां शिव शक्ति को मानने वाले राजाओं का शासन रहा होगा। खुदाई होने पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल पाएगी। शिक्षक अनाम कश्यप ने बताया कि शिवलिंग के अलावा कई जगह ईंट का टीला भी है। बचपन से यहां हम देख रहे हैं कि जंगल में जगह-जगह हैं शिवलिंग। शिवलिंग के अलावा यहां देवी पार्वती का मंदिर भी है। शिक्षक नेपाल सिंह दिल्लीवार ने यहां पार्वती मंदिर की स्थापना की। यह मूर्ति उनके द्वारा किसी मूर्तिकार से बनवाई गई है।
पूरे बस्तर में शिवमंदिरों की भरमार
बस्तर संभाग के प्रायः सभी जिले में बड़ी संख्या में रियासतकालीन और प्राचीन शिव मंदिर हैं। कुछ साल पहले वीरान जंगलों में शिव की मूर्तियां मिली हैं, जहां कालांतर में लोगों ने शिवलिंग देखकर वहां मंदिर बनाया और यह स्थल आज काफी प्रसिद्ध हो गए हैं, जिसमें संभाग मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर ओडिशा के देवड़ा में स्थित झाड़ेश्वर महादेव मंदिर है।
प्रदेश में शराब की बिक्री को लेकर सरकार की नीति क्या है
यहां गांव के एक सिरहा को सपने में आया था कि घनघोर जंगल में जमीन के अंदर भगवान शिव हैं। ग्रामीणों के साथ सिरहा ने जंगल जाकर जमीन के अंदर प्रदेश में शराब की बिक्री को लेकर सरकार की नीति क्या है। उन्होंने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, चुनाव के दौरान संविदा कर्मचारियों को पक्की नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
खुदाई में पता चलेगा किस राजा का शासन
इतिहासकार और पुरातत्वविद रुद्रनारायण पाणीग्राही ने बताया कि, रियासतकालीन और पुरातात्विक दृष्टि से पाथरी गांव का काफी महत्व है। यह इतिहास में पार्वतीपुरम के नाम से दर्ज है। शिवलिंग के अलावा देवी पार्वती की मूर्ति भी पाथरी में मिली है। खुदाई के बाद पता चलेगा किसका शासन था।

