कोंडागांवछत्तीसगढ

ठेठ गृहणी से स्वरोजगार की ओर कदम बढाने में आशा एक उम्मीद की किरण बन रही मददगार

कोंडागांव न्यूज़ जिला प्रशासन द्वारा लाईवलीहुड काॅलेज के साथ मिल कर संचालित ‘आशा एक उम्मीद की किरण‘ महिला सशक्तिकरण संस्थान ने अपने नाम के अनुरूप उन घरेलु महिलाओं के जीवन को रौशन किया है, जिनकी सीमाएं सिर्फ चुल्हे-चैके तक ही सीमित थी। ये वही महिलाएं हैं जो घर दहलीज को पार कर कुछ नया करने के लिए उत्सुक थीं, परंतु चाह कर भी उनके लिये अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।

महिलाओं को बना रही आत्म निर्भर अब

आशा एक उम्मीद की किरण संस्था इन महिलाओं को सिलाई कार्य में प्रशिक्षित कर स्वरोजगार के लिये प्रोत्साहित कर रही है। संस्था का उद्देश्य न केवल इनको प्रशिक्षित करना है बल्कि उन्हें अपने स्तर पर लघु उद्यम स्थापित करने में भी मदद करना भी है।कोरोना काल में बनाये हजारों मास्क आशा एक उम्मीद की किरण में आंगनबाड़ी से लेकर स्कूली बच्चों के गणवेश, महिलाओं के कपड़े जैसे सलवार कमीज, ब्लाउज, एप्रन आदि बनाना भी सिखाया जाता है और इनकी आपूर्ति शासकीय, गैर शासकीय विभागों में भी की जाती है। इनमें शिक्षा विभाग, आदिम जाति विकास विभाग प्रमुख हैं। हाल ही में महिला बाल विकास विभाग द्वारा भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कपड़े सिलाई के भी आॅर्डर दिये गये हैं। इसके अलावा कोरोना काल में भी मास्क निर्माण का कार्य भी महिलाओं द्वारा किया गया।

बांसकोट की आरती ने बताया ये

उक्त प्रशिक्षण केन्द्र में विकासखण्ड विश्रामपुरी के ग्राम बांसकोट निवासी श्रीमती आरती मरकाम ने बताया कि वे बारहवीं कक्षा तक ही पढ़ पाई थीं। परंतु कुछ अतिरिक्त आय करने की इच्छा ने उन्हें सिलाई प्रशिक्षण के लिये प्रेरित किया। चूंकि उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। अतः उनके लिये यह प्रशिक्षण काफी लाभप्रद रहा और वे अब कपड़े की कटिंग से लेकर सिलाई तक का पूरा कार्य सीख चुकी हैं।

अर्चना षर्मा को है स्वरोजगार की पूरी उम्मीद

कोण्डागांव मुख्यालय में ही निवासी महिला श्रीमती अर्चना शर्मा ने कहा कि रोजगारी पारा में उनके पति की छोटी सी फैंसी की दुकान है, परंतु अतिरिक्त आमदनी की आस में यहां से ट्रेनिंग लेकर अपनर कपड़े सिलाई की एक दुकान खोलना चाहती हैं। इसके अलावा संस्थान में कार्यरत् अन्य महिलाएं ममता झा, जयमनी देवांगन, इंद्रा देवांगन, सुब्बी मरकाम, पुष्पलता देवांगन ने भी अपने विचारों को व्यक्त किये।

अन्य महिलाओं के लिये है मिसाल

ठेठ गृहिणी से स्वरोजगार हासिल करने का सफर तय करती इन महिलाओं का संदेश उनके जैसी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। साथ ही अगर कोई महिला निजी तौर पर अपने घर में ही सिलाई करना चाहती है, तो उन्हें भी बतौर लोन पर सिलाई मशीन उपलब्ध कराया जाता है।

परियोजना की प्रशिक्षक श्रीमती वेदिका पाण्डे

वर्तमान में इस प्रोजेक्ट से 150 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें जिला मुख्यालय के अलावा आस-पास के गांव-देहात की महिलाएं भी पूरे उत्साह से अपने इस नये कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहीं हैं। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सिलाई से संबंधित समस्त कार्य जैसे कपड़े की कटाई, सिलाई, धागे, बटन की समस्त बारीकियां सिखाई जाती है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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